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हरियाणा में करंट लगने से बच्चे की मौत: छत पर लगे हाईटेंशन तार में उलझी पतंग की डोर, निकालते समय झुलसा।

ग्रामीणों ने उठाई बिजली विभाग पर सवाल
 
करंट
विशेषज्ञों का मानना है कि हाईटेंशन लाइनें रिहायशी इलाकों में नहीं होनी चाहिए।

यमुनानगर  जिले के बिलासपुर क्षेत्र के धर्मकोट गांव में एक दर्दनाक हादसे में 13 वर्षीय बच्चे की जान चली गई। यह हादसा मंगलवार शाम उस समय हुआ, जब तनिष्क नामक लड़का छत पर पतंग उड़ा रहा था। खेल-खेल में पतंग की डोर छत से गुजर रही 11 हजार वोल्टेज की हाईटेंशन लाइन में उलझ गई। जैसे ही उसने डोर निकालने की कोशिश की, उसे तेज करंट लगा और वह छटपटाता हुआ छत पर दूर जा गिरा।

खेल की जगह बन गया मौत का मैदान

बताया जा रहा है कि तनिष्क रोज़ की तरह स्कूल से आने के बाद दोस्तों के साथ पतंगबाजी कर रहा था। गांव के घरों की छतों के ऊपर से हाईटेंशन लाइनें गुजर रही हैं, जो काफी खतरनाक स्थिति में हैं। छत पर खेलते-खेलते जब उसकी पतंग तारों में उलझ गई, तो उसने बिना सोचे-समझे उसे निकालने की कोशिश की। तभी एक जोरदार धमाके के साथ उसे करंट लगा और वह बुरी तरह झुलस गया।

परिवार में मचा कोहराम

घटना के बाद परिजन बदहवास हो गए। जैसे ही उन्होंने छत से तेज आवाज और बच्चे की चीख सुनी, दौड़कर ऊपर पहुंचे। तनिष्क गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़ा हुआ था। उसे तुरंत यमुनानगर के सिविल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मां बार-बार बेहोश हो रही है, वहीं पिता भी इस हादसे से टूट चुके हैं। गांव में मातम का माहौल है और हर कोई इस हादसे से स्तब्ध है।

ग्रामीणों ने उठाई बिजली विभाग पर सवाल

धर्मकोट गांव के लोगों ने बिजली विभाग की लापरवाही पर नाराजगी जाहिर की है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद गांव के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन को शिफ्ट नहीं किया गया। यह कोई पहली घटना नहीं है, इससे पहले भी कई बार छोटे-मोटे हादसे हो चुके हैं।

ग्रामीणों ने बिजली विभाग और प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इस तरह की तारों को हटाया जाए ताकि भविष्य में कोई और हादसा न हो।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी

विशेषज्ञों का मानना है कि हाईटेंशन लाइनें रिहायशी इलाकों में नहीं होनी चाहिए। अगर मजबूरीवश ऐसा करना भी पड़े तो तारों की ऊंचाई और सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है। लेकिन ग्रामीण इलाकों में अक्सर इन मानकों की अनदेखी कर दी जाती है, जिसका खामियाजा आम लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है।

प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में

घटना के कई घंटे बीत जाने के बावजूद बिजली विभाग और प्रशासन का कोई अधिकारी गांव नहीं पहुंचा। लोगों में इस बात को लेकर काफी गुस्सा है। ग्राम पंचायत ने प्रशासन से इस मामले में जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

अंतिम संस्कार और संवेदनाएं

बुधवार सुबह तनिष्क का अंतिम संस्कार गांव के श्मशान घाट में किया गया। अंतिम संस्कार में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। सभी की आंखें नम थीं और हर कोई यही कह रहा था कि अगर समय रहते बिजली विभाग ने ध्यान दिया होता, तो एक मासूम की जान बचाई जा सकती थी।

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