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हरियाणा में धान की खेती करने वाले किसानों को बिजाई के लिए मशीन के साथ 4500 रुपये प्रति एकड़ देगी सरकार

 
Haryana Paddy Cultivation: धान की सीधी बिजाई पर ₹4500 और ₹115 में मिलेगी मशीन
हरियाणा किसान योजनाः हरियाणा सरकार ने हिसार और सिरसा सहित प्रदेश भर के धान उत्पादक किसानों के लिए सीधी बिजाई (DSR) तकनीक अपनाने पर 4500 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि और मात्र 115 रुपये में बिजाई मशीन उपलब्ध कराने की घोषणा की है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के इस कदम से न केवल गिरते भूजल स्तर को सुधारने में मदद मिलेगी, बल्कि पारंपरिक रोपाई के मुकाबले किसानों की खेती लागत में भी भारी कमी आएगी।

नाममात्र किराए पर मिलेगी डीएसआर मशीन

कृषि विभाग हिसार ने उन किसानों के लिए विशेष सुविधा शुरू की है जो इस सीजन में धान की सीधी बिजाई करने की योजना बना रहे हैं। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि किसानों को विभाग की ओर से डीएसआर (DSR) मशीन मात्र 115 रुपये प्रति एकड़ के किराए पर उपलब्ध कराई जा रही है। 

आमतौर पर गांव में निजी ट्रैक्टर मालिकों से सीधी बिजाई करवाने के लिए किसानों को 1000 रुपये से लेकर 1200 रुपये तक का भुगतान करना पड़ता है। विभाग ने इस मशीन को "पहले आओ-पहले पाओ" के आधार पर आवंटित करने का निर्णय लिया है। हिसार जिले के किसान इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए विभाग के कनिष्ठ अभियंता (JE) आजाद सिंह के मोबाइल नंबर 9416444144 पर संपर्क कर मशीन बुक कर सकते हैं।

मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण

सीधी बिजाई तकनीक अपनाने वाले किसानों के लिए सरकार ने प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने की प्रक्रिया को बेहद सरल बनाया है। किसानों को 20 मई 2026 से 10 जून 2026 के बीच 'मेरी फसल-मेरा ब्योरा' पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पंजीकरण के दौरान किसानों को स्पष्ट करना होगा कि उन्होंने कितने क्षेत्र में धान की सीधी बिजाई की है। पंजीकरण पूरा होने के बाद विभाग की टीमें खेतों का भौतिक सत्यापन करेंगी और उसके बाद 4500 रुपये प्रति एकड़ की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें जमीन की कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं की गई है, जिससे छोटे और बड़े सभी किसान समान रूप से लाभान्वित हो सकेंगे।

पानी और लेबर की भारी बचत

धान की पारंपरिक रोपाई पद्धति में पहले नर्सरी तैयार की जाती है और फिर पूरे खेत में पानी भरकर पौधों की रोपाई होती है, जिसमें अत्यधिक पानी और लेबर की आवश्यकता पड़ती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मशीन द्वारा सीधी बिजाई करने से लगभग 20 से 25 प्रतिशत पानी की बचत होती है और कद्दू (Puddling) करने का खर्च भी बच जाता है। 

हिसार के कृषि विभाग के अधिकारी ने बताया कि सीधी बिजाई से जमीन की सेहत भी बरकरार रहती है क्योंकि इसमें मिट्टी की ऊपरी परत को ज्यादा नुकसान नहीं पहुँचता। जो किसान लेबर की कमी और बिजली की किल्लत से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह तकनीक किसी वरदान से कम नहीं है।

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किसानों के लिए आधुनिक खेती का अवसर

राज्य सरकार धान के वैकल्पिक तरीकों को बढ़ावा देकर हरियाणा को डार्क जोन की समस्या से बाहर निकालना चाहती है। कृषि मंत्री ने विभागीय बैठक में निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर किसानों को जागरूक करने के लिए कैंप लगाए जाएं। सिरसा और हिसार जैसे धान बहुल क्षेत्रों में विभाग की टीमें गांवों में जाकर किसानों को सीधी बिजाई के फायदे समझा रही हैं। 

अधिकारियों ने कहा कि सरकार चाहती है कि किसान खेती की पुरानी और खर्चीली पद्धतियों को छोड़कर तकनीक का सहारा लें ताकि उनकी शुद्ध आय में वृद्धि हो सके। पंजीकरण की खिड़की खुलते ही किसान अपने नजदीकी सीएससी (CSC) सेंटर या स्वयं पोर्टल के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूरी करें ताकि समय पर भौतिक सत्यापन और भुगतान सुनिश्चित हो सके।
 

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