हरियाणा में पशुपालन के लिए सरकार फ्री दे रही 16 भेड़-बकरी, फटाफट उठाएं योजना का लाभ
पशुपालन एवं डेयरी विभाग हरियाणा ने सिरसा सहित पूरे प्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग के परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 'मुख्यमंत्री भेड़-बकरी पालक उत्थान योजना' के तहत नि:शुल्क पशु वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस योजना के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को बिना किसी खर्च के भेड़ और बकरी पालन का व्यवसाय शुरू करने के लिए पशु उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करना और आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों की आय में वृद्धि करना है।
15 मादा और एक नर पशु नि:शुल्क
इस विशेष योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा लाभार्थी को अपनी पसंद के अनुसार 15+1 बकरी (15 मादा और 1 नर) अथवा 15+1 भेड़ (15 मादा और 1 नर) का यूनिट पूरी तरह नि:शुल्क प्रदान किया जाएगा। केवल पशु ही नहीं, बल्कि सरकार इन पशुओं के शुरुआती रखरखाव के लिए हरा चारा और साल्ट ब्लॉक जैसी आवश्यक सुविधाएं भी मुफ्त उपलब्ध कराएगी। विभाग का मानना है कि भेड़ और बकरी पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो बहुत कम जगह और कम लागत में शुरू किया जा सकता है, जिससे भूमिहीन परिवारों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा।
एक साल बाद पशुओं की वापसी का नियम
योजना की सबसे अनूठी शर्त पशुओं की वापसी से जुड़ी है, जो इस चक्र को निरंतर बनाए रखने के लिए बनाई गई है। जब लाभार्थी को पशु मिलते हैं, तो उसे एक वर्ष तक उनकी देखभाल करनी होती है। एक वर्ष बाद जब पशुओं की संख्या बढ़कर लगभग 40 से 50 हो जाएगी, तब विभाग उनमें से 10 मादा पशु और एक नर पशु वापस ले लेगा। इन वापस लिए गए पशुओं को आगे अन्य नए जरूरतमंद लाभार्थियों को योजना के तहत प्रदान किया जाएगा, जिससे यह योजना एक स्वावलंबी मॉडल के रूप में कार्य करती रहेगी।
कौन कर सकता है आवेदन और पात्रता
योजना का लाभ लेने के लिए हरियाणा सरकार ने कुछ बुनियादी शर्तें निर्धारित की हैं जिनका पालन करना अनिवार्य है। आवेदन करने वाले लाभार्थी की आयु 18 से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए और वह हरियाणा का स्थायी निवासी होना चाहिए। इस योजना के लिए किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता या पूर्व प्रशिक्षण की अनिवार्यता नहीं रखी गई है, ताकि गांव का साधारण व्यक्ति भी इसका लाभ उठा सके। पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह योजना केवल व्यक्तिगत लाभार्थियों के लिए है, इसलिए किसी भी समूह, फर्म या संगठन के आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज और प्रक्रिया
पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ उठाने के लिए 'सरल हरियाणा' पोर्टल या विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। आवेदन के समय अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे दस्तावेज अनिवार्य रूप से अपलोड करने होंगे। इसके साथ ही आवेदक को एक स्वयं-घोषणा पत्र और डेढ़ वर्ष बाद पशुओं की वापसी से संबंधित एक शपथ पत्र भी देना होगा। एक महत्वपूर्ण शर्त यह भी है कि आवेदक के पास पशुओं को रखने के लिए शेड निर्माण हेतु पर्याप्त खाली स्थान उपलब्ध होना चाहिए, जिसका प्रमाण आवेदन के साथ देना आवश्यक रहेगा।
ग्रामीण स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उपनिदेशक डा. सुखविंद्र सिंह ने योजना की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा, "पशुपालन विभाग की यह योजना ग्रामीण बेरोजगार युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है। भेड़ और बकरी पालन कम लागत में शुरू होने वाला व्यवसाय माना जाता है, जिससे लाभार्थी नियमित आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं।" उन्होंने सिरसा जिले के पात्र युवाओं से अपील की है कि वे इस योजना का लाभ उठाकर अपने पैरों पर खड़े हों। विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर लोगों को इस योजना के तकनीकी पहलुओं और पशुओं के स्वास्थ्य प्रबंधन के बारे में भी जानकारी दे रही हैं।
आवेदनों की स्क्रूटनी के बाद विभाग द्वारा भौतिक सत्यापन किया जाएगा और उसके बाद पशुओं का वितरण शुरू होगा। इच्छुक उम्मीदवार जल्द से जल्द अपने नजदीकी सीएससी सेंटर या विभाग के कार्यालय में संपर्क कर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
