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हरियाणा बड़ा गेहूं खरीद घोटालाः करनाल में बाहरी राज्यों की गेहूं हरियाणा के किसानों के नाम दिखा घोटाला, 5 फर्मों पर केस दर्ज

 
हरियाणा गेहूं खरीद घोटाला Haryana wheat procurement scam करनाल इंद्री मंडी फर्जीवाड़ा 5 फर्म केस 8 May 2026

हरियाणा। करनाल के इंद्री स्थित नई अनाज मंडी और बियाना सब-यार्ड में गेहूं खरीद के दौरान करोड़ों के फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर पुलिस ने 7 मई को पांच आढ़ती फर्मों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे जिले की मंडियों में हड़कंप मच गया है क्योंकि उत्तर प्रदेश जैसे बाहरी राज्यों से लाए गए गेहूं को हरियाणा के किसानों के नाम पर ई-खरीद पोर्टल पर दर्ज कर सरकारी खरीद प्रणाली को भारी आर्थिक चपत लगाई जा रही थी।

इंद्री मार्केट कमेटी सचिव की शिकायत पर कार्रवाई

गेहूं खरीद सीजन 2026 के दौरान सामने आईं गंभीर अनियमितताओं को लेकर इंद्री मार्केट कमेटी के सचिव अजीत सिंह ने थाना इंद्री में लिखित शिकायत दी थी। सचिव ने पुलिस को भेजे पत्र में स्पष्ट किया कि अधिकारियों द्वारा मौके पर किए गए निरीक्षण, रिकॉर्ड की जांच और स्थानीय स्तर पर की गई पूछताछ में प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी के पुख्ता सबूत मिले हैं। जांच टीम ने पाया कि मंडियों में तैनात कुछ कमीशन एजेंटों ने नियमों को ताक पर रखकर सरकारी खजाने और पारदर्शिता को नुकसान पहुंचाया है। मार्केट कमेटी सचिव अजीत सिंह ने कहा, "हमने विस्तृत जांच के बाद पुलिस को रिपोर्ट सौंपी थी और रिकॉर्ड में हेरफेर करने वाली सभी पांचों फर्मों के लाइसेंस नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई है।"

यूपी का गेहूं और हरियाणा के फर्जी किसान

जांच के दौरान सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि आरोपी फर्मों के मालिक उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों से सस्ते दामों पर गेहूं लाकर उसे इंद्री और बियाना मंडी में पहुंचा रहे थे। इस बाहरी अनाज को स्थानीय किसानों के डेटा का इस्तेमाल कर ई-खरीद पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा था ताकि सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ लिया जा सके। यह पूरी प्रक्रिया सरकारी नियमों के विरुद्ध पाई गई क्योंकि पोर्टल केवल हरियाणा के पंजीकृत किसानों के लिए है। इस हेरफेर से जहां असली किसानों के हक पर डाका डाला गया, वहीं सरकारी एजेंसियों को गलत तरीके से भुगतान लेने की साजिश रची गई।

इन पांच आढ़ती फर्मों पर गिरी गाज

पुलिस ने इंद्री मंडी और बियाना सब-यार्ड की जिन फर्मों को जांच में दोषी पाया है, उनके खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है। इसमें संदीप कुमार की फर्म मैसर्स जसमेर सिंह जरनैल सिंह, जय भगवान की फर्म मैसर्स सरधा राम जय भगवान और अरुण कुमार की फर्म मैसर्स राम सरूप रतन लाल शामिल हैं। वहीं बियाना सब-यार्ड से राय सिंह की फर्म मैसर्स अमर सिंह राय सिंह और अंकित कुमार की फर्म मैसर्स मूनक एंटरप्राइजेज पर मामला दर्ज हुआ है। इन सभी पर सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर करने, फर्जी किसान दिखाने और लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप हैं।

ड्राइवरों को रिश्वत और अवैध लिफ्टिंग

इस घोटाले का एक और काला पहलू गेहूं की उठान (लिफ्टिंग) प्रक्रिया में सामने आया है। जांच अधिकारियों को सबूत मिले हैं कि कुछ आढ़तियों ने ट्रांसपोर्टरों और उनके ड्राइवरों को पैसे देकर अपनी फर्मों का गेहूं पहले उठवाया। ट्रांसपोर्टर फर्म मैसर्स नरवाल कंपनी के लिखित बयानों ने इस अवैध लेनदेन की पुष्टि की है। बयान में बताया गया कि मैसर्स सरधा राम जय भगवान और मैसर्स राम सरूप रतन लाल जैसी फर्मों ने ड्राइवरों के साथ मिलकर भ्रष्टाचार किया ताकि मंडी से उनका माल प्राथमिकता के आधार पर बाहर निकल सके और रिकॉर्ड में हेरफेर छिपाई जा सके।

सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल

अधिकारियों द्वारा की गई जांच में चार मुख्य बिंदु उजागर हुए हैं जिनमें बाहरी राज्यों से गेहूं की आवक, ई-खरीद पोर्टल पर गलत एंट्री, लिफ्टिंग के लिए अवैध भुगतान और सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन शामिल है। इस घोटाले ने हरियाणा की ऑनलाइन खरीद प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों से न केवल सरकार को राजस्व की हानि हुई है, बल्कि मंडी व्यवस्था की विश्वसनीयता भी प्रभावित हुई है। लाइसेंस शर्तों के उल्लंघन के चलते इन फर्मों के लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

थाना इंद्री पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और मंडी सचिव द्वारा उपलब्ध कराए गए सस्पेंशन ऑर्डर और अन्य दस्तावेजों की गहनता से पड़ताल की जा रही है। पुलिस अब उन सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करेगी जिनकी मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी संख्या में पोर्टल पर फर्जी एंट्री होना संभव नहीं था।
 

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