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Haryana News: सिरसा-हिसार सहित 10 शहरों में बनेंगी IMT, किसानों को जमीनो के लिए मुआवजे के साथ 50% की रहेगी हिस्सेदारी

हरियाणा में 10 नई IMT बनाने का रास्ता साफ, लैंड पूलिंग पॉलिसी में हुआ बड़ा बदलाव
 
 
Haryana government amends land pooling policy for 10 new IMTs ensuring 50 percent share of developed land for farmers Haryana Land Pooling Policy New IMT

Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य में नई औद्योगिक टाउनशिप (आईएमटी) विकसित करने के लिए अपनी लैंड पूलिंग पॉलिसी में ऐतिहासिक बदलाव किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में 'किसान-भागीदारी आधारित औद्योगिक विकास' मॉडल को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत अब किसानों को जमीन के बदले सिर्फ मुआवजा नहीं मिलेगा, बल्कि उन्हें दी गई कुल जमीन के बदले 50 प्रतिशत विकसित व्यावसायिक जमीन में हिस्सेदारी दी जाएगी। इस मास्टरस्ट्रोक फैसले से प्रदेश में 10 नई आईएमटी विकसित करने में आ रही भूमि अधिग्रहण की सबसे बड़ी बाधा पूरी तरह से समाप्त हो गई है।

उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में तैयार किए गए इस नए प्रारूप से सरकार, किसान और उद्योग तीनों को फायदा होगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में 10 नई आईएमटी बनाने की घोषणा की है, जिनमें सिरसा (एग्री-बेस्ड), हिसार (एयरपोर्ट के पास), जींद, रोहतक (ईवी पार्क), सोहना (विस्तार), नारनौल (लॉजिस्टिक हब), पलवल (ग्रेटर फरीदाबाद), अंबाला, नारायणगढ़ और रेवाड़ी शामिल हैं। इनमें सबसे बड़ा प्रोजेक्ट जींद में होगा, जो दिल्ली-कटरा और 152डी एक्सप्रेसवे के पास करीब 12 हजार एकड़ में प्रस्तावित है। इस नई नीति के सकारात्मक परिणाम जमीनी स्तर पर दिखने भी लगे हैं; नारायणगढ़ आईएमटी के लिए किसानों ने सरकार को 450 एकड़ जमीन देने पर अपनी औपचारिक सहमति दे दी है।  

किसानों के लिए फायदे का सौदा

नई पॉलिसी के गणित के अनुसार, यदि कोई किसान एक एकड़ (करीब 4000 वर्ग मीटर) जमीन देता है, तो उसमें से लगभग 1500 वर्ग मीटर बुनियादी ढांचा (सड़कें, सीवरेज, पार्क आदि) विकसित करने में खर्च हो जाएगा। शेष बचे 2500 वर्ग मीटर में से आधा हिस्सा (1200 से 1250 वर्ग मीटर) किसान को विकसित प्लॉट के रूप में दिया जाएगा, जबकि आधा हिस्सा सरकार का होगा। किसानों को यह छूट रहेगी कि वे अपनी सुविधानुसार छोटे-छोटे प्लॉट लें या एक बड़ा भूखंड। इसके अतिरिक्त, किसानों को एक 'भूमि अधिकार प्रमाण पत्र' जारी किया जाएगा, जिसका उपयोग वे तत्काल बैंक से ऋण लेने या उसे खुले बाजार में बेचने के लिए कर सकेंगे। यह लचीला मॉडल भविष्य में जमीन की कमर्शियल कीमत बढ़ने पर किसानों को सीधे मुआवजे से कहीं ज्यादा मुनाफा देगा।

उद्योगों के लिए खत्म होगी जमीन की कमी

अब तक ई-भूमि पोर्टल पर मनमाने रेट मांगे जाने और मुआवजे को लेकर होने वाले विवादों के कारण औद्योगिक परियोजनाओं में भारी देरी होती थी। सरकार ने किसानों को सीधा हिस्सेदार बनाकर एक सुरक्षित और विवाद-रहित रास्ता निकाल लिया है। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि इस योजना से राज्य सरकार के पास निर्धारित समय से पहले नई आईएमटी विकसित करने के लिए पर्याप्त 'लैंड बैंक' तैयार हो जाएगा। इससे बाहरी निवेशकों और औद्योगिक इकाइयों को स्थापित करने में किसी तरह की परेशानी नहीं आएगी। अंबाला और नारायणगढ़ में भूमि पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जो हरियाणा की अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
 

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