सिरसा में कपास की फसल का संयुक्त सर्वेक्षण, किसानों को बताया कम कीटनाश प्रयोग करके बेहतर पैदावार करके के गजब तरीके
सिरसा। कपास की फसल को शुरुआती दौर में कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए कृषि विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के क्षेत्रीय एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन केंद्र (फरीदाबाद) और जिला सिरसा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों ने 26 मई को सिरसा के विभिन्न क्षेत्रों में कपास की फसल का एक अहम संयुक्त सर्वेक्षण किया। इस दौरान खेतों में जाकर किसानों को हानिकारक रासायनिक कीटनाशकों की जगह यांत्रिक और जैविक उपायों को अपनाने के लिए जागरूक किया गया, ताकि फसल की लागत कम हो और पैदावार बेहतर मिल सके।
यह महत्वपूर्ण निरीक्षण फरीदाबाद केंद्र की क्षेत्रीय हेड एवं उपनिदेशक डॉ. वंदना पांडेय के निर्देशन और सिरसा कृषि विभाग के डॉ. विजेंद्र पाल के विशेष सहयोग से किया गया। सर्वेक्षण टीम ने खेतों में कपास के पौधों की मौजूदा स्थिति जांची और किसानों को सीधा मार्गदर्शन दिया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट रूप से सलाह दी कि फसल के इस शुरुआती चरण में कीटों की निगरानी और रोकथाम सबसे ज्यादा जरूरी है। इसके लिए किसानों को अपने एक खेत में कम से कम चार फेरोमन ट्रैप और कपास के ल्यूअर (Lure) का प्रयोग अनिवार्य रूप से करना चाहिए, जो कीटों को शुरुआती अवस्था में ही रोक लेता है।
इस सर्वेक्षण का सबसे बड़ा आकर्षण 'राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली' यानी एनपीएसएस (NPSS) मोबाइल ऐप रहा। टीम ने किसानों को इस आधुनिक तकनीक से जुड़ने की अपील की। विशेषज्ञों ने बताया कि यह ऐप अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) तकनीक पर काम करता है और इसमें हाल ही में एक स्मार्ट 'चैटबॉट' फीचर भी जोड़ा गया है। किसान जैसे ही अपनी फसल या संभावित कीट की जानकारी इस ऐप में दर्ज करते हैं, उन्हें तुरंत सटीक और वैज्ञानिक सलाह मिल जाती है।
कृषि विभाग का मानना है कि इस एनपीएसएस (NPSS) ऐप के इस्तेमाल से किसानों की स्थानीय कीटनाशक विक्रेताओं पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी। अमूमन जानकारी के अभाव में किसान महंगे और गैर-जरूरी रसायनों का छिड़काव कर देते हैं, जिससे न सिर्फ पैसों की बर्बादी होती है बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी नष्ट होती है। यह ऐप किसानों को हिंदी और पंजाबी सहित कई भाषाओं में रियल-टाइम समाधान देकर इस समस्या को जड़ से खत्म करने का काम कर रहा है।
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कपास के खेतों में उतारी गई इस संयुक्त सर्वेक्षण टीम में केंद्र और राज्य दोनों के अधिकारी शामिल रहे। भारत सरकार के फरीदाबाद केंद्र की तरफ से सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी लक्ष्मीकांत, के.पी. शर्मा और सुरजी वर्मन ने कमान संभाली। वहीं, स्थानीय स्तर पर सिरसा कृषि विभाग से डॉ. विजेंद्र पाल और सहायक पौधा संरक्षण अधिकारियों ने मिलकर किसानों की शंकाओं का समाधान किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आधुनिक डिजिटल तकनीक और जैविक उपायों के तालमेल से ही इस बार कपास की बंपर और सुरक्षित पैदावार ली जा सकती है।
