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चोपटा के किसानों को कृषि वैज्ञानिकों ने बताया धान के बौने रोग और नरमे के कीड़ों का पक्का जुगाड़, आप भी जाने

 
सिरसा के अरनियांवाली गांव में किसानों को बीज उपचार और NPSS ऐप की जानकारी देते हुए कृषि विभाग के अधिकारी।

नाथूसरी चौपटा (सिरसा)। हरियाणा में धान और नरमे (कपास) की खेती करने वाले किसानों के लिए एक बेहद जरूरी खबर है। पिछले साल धान की फसल में आए 'बौने रोग' और नरमे में लगने वाले भयंकर कीड़ों से किसानों का लाखों रुपये का नुकसान हुआ था। इस बार ऐसा नुकसान न हो, इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार का कृषि विभाग अभी से अलर्ट मोड पर आ गया है। शुक्रवार को फरीदाबाद और सिरसा कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने चौपटा क्षेत्र के अरनियांवाली गांव में पहुंचकर खेतों का मुआयना किया और किसानों को फसल बचाने के अचूक तरीके बताए।

वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि धान और नरमे की बिजाई से पहले 'बीज उपचार' (बीज को दवाई लगाना) बहुत जरूरी है। अगर किसान बिना उपचार के सीधे बीज बोते हैं, तो फसल में पुरानी बीमारियां और बौना रोग लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। किसानों को जहरीले और महंगे रासायनिक कीटनाशकों से बचाने के लिए मौके पर ही 'ट्राइकोडर्मा विरिडी' नामक जैविक कीटनाशक भी मुफ्त बांटे गए। इसके साथ ही, नरमे की फसल को शुरुआती कीड़ों से बचाने के लिए बिजाई के 40-45 दिन बाद खेत में कम से कम 4 फेरोमोन ट्रैप (कीड़े पकड़ने वाले जाल) लगाने की सलाह दी गई है।

किसानों को अब खेतों में बीमारी आने पर दवाइयों की दुकानों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। भारत सरकार ने किसानों के लिए 'राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली' (NPSS) नाम का एक बेहद काम का मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। कृषि अधिकारियों ने चौपटा के किसानों को इस ऐप के फायदे बताते हुए कहा कि अगर वे इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो फसल में कोई भी बीमारी या कीड़ा लगने पर उन्हें घर बैठे वैज्ञानिकों से सही दवा और सटीक सलाह मिल जाएगी। इससे अनाप-शनाप दवाइयों पर होने वाला भारी खर्च बचेगा और फसल भी सुरक्षित रहेगी।

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गांव अरनियांवाली में चले इस जागरूकता अभियान का नेतृत्व भारत सरकार के फरीदाबाद स्थित क्षेत्रीय एकीकृत कीट प्रबंधन केंद्र (CIPMC) की उप निदेशक डॉ. वंदना पांडे ने किया। उनके साथ सिरसा के कृषि उप निदेशक डॉ. सुखदेव सिंह, एसडीएओ डॉ. कोमल, चौपटा के खंड कृषि अधिकारी डॉ. शैलेंद्र सहारण और बीटीएम डॉ. महेंद्र सिंह डांडी मौजूद रहे। इसके अलावा फरीदाबाद से आए सहायक पौध संरक्षण अधिकारी डॉ. के.पी. शर्मा और डॉ. सुरजीत बर्मन ने भी सीधे खेतों में जाकर किसानों के साथ अपनी जानकारी साझा की।

NPSS मोबाइल ऐप का कैसे करें इस्तेमाल:

  1. सबसे पहले अपने मोबाइल के गूगल प्ले स्टोर में जाएं और 'NPSS' (National Pest Surveillance System) ऐप सर्च करके डाउनलोड करें।
  2. ऐप खुलने पर अपना चालू मोबाइल नंबर दर्ज करें और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करें।
  3. जब भी आपकी फसल में कोई कीड़ा या बीमारी नजर आए, तो ऐप के जरिए उसकी साफ फोटो खींचकर अपलोड कर दें।
  4. कुछ ही समय में सरकारी कृषि वैज्ञानिकों द्वारा आपकी बीमारी की जांच कर सही और सस्ती दवा की जानकारी आपके मोबाइल पर भेज दी जाएगी।
     
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