सिरसा के गांव खारिया में सोलर पंपों को बनाया 'स्मार्ट', सिंचाई के बाद चलेंगी चक्की और ईवी
सिरसा जिले के गांव खारिया में खेती के आधुनिकीकरण और सौर ऊर्जा के बेहतरीन उपयोग को लेकर एक ऐतिहासिक शुरुआत हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डीजल मुक्त कृषि और पीएम-कुसुम (PM-KUSUM) योजना के विजन को धरातल पर उतारते हुए, बर्मिंघम सिटी यूनिवर्सिटी (यूके) और भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों की एक संयुक्त टीम ने यहां एक हाई-टेक स्मार्ट सौर सिंचाई प्रणाली का सफल परीक्षण किया है। इस नई तकनीक से न केवल सिंचाई में क्रांति आएगी, बल्कि किसानों की आय में भी सीधा इजाफा होगा।
पारंपरिक सौर पंप साल में लगभग 150 दिन खाली पड़े रहते हैं और उनकी अतिरिक्त ऊर्जा बर्बाद हो जाती है। इसी 'गैप' को भरने के लिए यूके के विशेषज्ञों और भारतीय वैज्ञानिकों ने प्रगतिशील किसान दयानंद झाझरिया के खेत में अत्याधुनिक स्मार्ट सेंसर और एक स्वचालित यूनिवर्सल कंट्रोलर स्थापित किया है।
यह ऑटोमैटिक कंट्रोलर सिंचाई पूरी होने के बाद बची हुई अतिरिक्त सौर ऊर्जा को आटा चक्की, चारा काटने की मशीन, ईवी चार्जिंग और घरेलू उपकरणों को चलाने के लिए डायवर्ट कर देता है, जिससे पूरा खेत एक आत्मनिर्भर पावर हब में बदल जाता है।
इस पूरे प्रोजेक्ट का नेतृत्व बर्मिंघम सिटी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर चाम अटवाल, प्रो. फ्लोरिंड गुएनेट, प्रो. शशांक और प्रो. नवजोत संधू ने किया है। इस अंतरराष्ट्रीय टीम को पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के प्रो. वाई.पी. वर्मा, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (CCSHAU) के डॉ. संदीप और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय (GJUST) हिसार के डॉ. राजेंदर कुमार का अहम तकनीकी सहयोग मिला।
इन स्मार्ट सेंसर्स को क्लाउड तकनीक से जोड़ा गया है, जो लगातार तापमान, बारिश, सौर पैनल की हीट और प्रति घंटे पानी के इस्तेमाल का सटीक डेटा रियल-टाइम में प्रदान करते हैं। सिरसा जैसे जिले में जहां भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, वहां यह तकनीक पानी की एक-एक बूंद का हिसाब रखकर जल संरक्षण में मील का पत्थर साबित होगी।
इस सफल प्रदर्शन के बाद विशेषज्ञों ने स्थानीय स्तर पर एक कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें करीब 65 किसानों और महिला उद्यमियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भारत के कृषि क्षेत्र में दो-तिहाई हिस्सेदारी रखने वाली महिलाओं का काम इस तकनीक से कैसे आसान होगा।
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अब उन्हें खेत में भारी शारीरिक श्रम नहीं करना पड़ेगा और कृषि-प्रसंस्करण (Agro-processing) के जरिए वे घर बैठे आय के नए साधन पैदा कर सकेंगी। इस डेटा-संचालित अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय ग्रिड पर किसानों की निर्भरता को खत्म करना और सरकारी सब्सिडी के बोझ को कम करते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देना है।
