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चोपटा क्षेत्र के सेमग्रस्त गांवों में जलभराव से नरमे की फसल बर्बाद, खड़ी फसल पर किसान ट्रैक्टर चलाने को मजबूर.

रुपाणा, शक्कर मंदोरी, शाह्पुरिया, नहराना, तरकांवाली, चाहरवाला,गुडिया  खेड़ा  के किसानों की करीब 2000 एकड़ नरमें की फसल हुई खराब,
 
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अब इस फसल को नष्ट करना पड़ रहा है.

 पिछले दिनों हुई बारिश से सिरसा नाथूसरी चोपटा खंड के सेम से प्रभावित 7  गांवों की करीब 2000 एकड़ नरमे की फसल में पानी भर गया है। जिससे किसानों को नरमे की फसल को जोतने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बारिश के कारण नरमे की फसल सहित दूसरी फसलों को भी बेहद नुकसान हुआ है।

जानकारी के अनुसार पिछले दिनों हुई बारिश के कारण चोपटा  ब्लॉक के 7 गांवों में नरमे तथा अन्य फसलों में पानी भरा था।

 

जिसमें गांव रुपाणा गंजा में 400 एकड़, रुपाणा बिश्नोईयां में  300 एकड़, शक्कर मंदौरी 500 एकड़, शाहपुरिया के 150 एकड़, नहाराणा 150 एकड़, तरकावाली 100 एकड़, गुडिया  खेड़ा, चाहरवाला में करीब 50 एकड़ के लगभग नरमा फसल बारिश के कारण पानी में डूब गई .

नरमे की फसल में पानी भरा होने से नरमा सूखने लगा है और मजबूरन किसानों को खेत जोतने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा मार गांव शक्कर,  रुपाना गंजा व बिश्नोइया के किसानों को पड़ी हैं। जिनका करीब 1200 एकड़ नरमे की फसल खराब हो गई है।

 

जिसे अब मजबूरन किसान जोतकर महंगे मूल्य पर धान की पनीरी लेकर रोपाई करने को मजबूर है। गांव शक्कर मंदोरी  निवासी किसान  अशोक कुमार कासनियां  द्वारा 7 एकड़ नरमे की फसल पर ट्रैक्टर चलाया। उन्होंने बताया कि उसने 7 एकड़ जमीन नरमे की बिजाई की थी।

बारिश का पानी भरने के कारण पूरा नरमा सूखने लग गया है। इसके साथ ही मोटरें लगाकर निकाला जा रहा हैलेकिन पानी खड़ा रहने के कारण नरमा सूखने लग गया है।

इसके अलावा गांव शक्कर मंदोरी निवासी किसान प्रदीप कुमार  का 4  एकड़मनीष का 2 एकड़राजेश सहारण की 2 एकड़मुकेश नम्बरदार की 4 एकड़किसान सुरेन्द्र की एकड़भरत सिंह की  8 एकड़, जय कुमार की 2 एकड़,तेजपाल की 3 एकड़, मांगे राम की 3 एकड़, रामस्वरूप की 2 एकड़, वीरेंद्र कासनियां की 3 एकड़   नरमे में बारिश का पानी भरा होने के कारण वो भी खराब हो रहा है।

 

सेमनाले में पानी बढ़ने से टूटने का खतरा

 

किसानों ने बताया कि बारिश और खेतों में खड़ा पानी किसानों द्वारा सेमनाले में छोड़ा जा रहा है। जिससे गांव शक्कर मंदोरी, शाह्पुरिया, तरकांवाली के निकट से गुजरने वाले सेमनाले में पानी का बहाव ज्यादा होने के कारण सेमनाले का किनारा टूटने का खतरा बना हुआ है। अगर ये सेमनाला टूटता है तो आसपास के गांव की हजारों एकड़ फसल पानी में डूबने से बर्बाद हो जाएगी।

 

किसानों ने विभागीय अधिकारियों से इस ओर ध्यान देते हुए सेमनाले की पटरी को मिट्टी से भरने की मांग की गई है। किसानों ने आरोप लगाया गया है कि विभागीय अधिकारियों ने बारिश के मौसम को देखते हुए सेमनाले की सफाई नहीं करवाई जिस कारण सेमनाले में पानी का बहाव ज्यादा है। कई किसानों ने जमीन ठेके पर लेकर नरमे की बिजाई की थीसारी मेहनत पर पानी फिर गया है।

किसान मुकेश कुमार, वीरेंद्र, अशोक कुमार ने बताया की उन्होंने  2 से 3 महीने पहले नरमे की फसल की बिजाई की थी, अब पानी में डूब जाने के कारण उन्हें काफी घाटा उठाना पड़ा है. किसानों का लगभग प्रति एकड़ करीब 10 हजार रूपये नरमा बिजाई पर खर्च हो चूका है.

अब इस फसल को नष्ट करना पड़ रहा है. इसके बाद धान की रोपाई की तो प्रति एकड़ के हिसाब से  6000 से 8000 रुपए किसानों के खर्च होंगे,  इन गांवों के किसानों पर बारिश की आपदा के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए सरकार से आवश्यक कदम उठाने की मांग की है.

इनका कहना है की जिन किसानों को नुकसान हुआ है उनकी भरपाई के लिए स्पेशल गिरदावरी कर किसानों को राहत हेतु कुछ कदम उठाने चाहिए.

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