https://www.choptaplus.in/

Sociology of religion: इवान्स प्रिचार्डः दी नुऐर(Evans Pritchard: The Nuer)

साथ ही साथ इसे टोटमवाद या मूर्तिपूजक भी कहा जा सकता है।
 
sociology ऑफ़ religion
ईश्वर एवं देवी-देवताओं की आराधना में ग्यानर्योग' शब्द का इस्तेमाल करते हैं

Sociology of religion: प्रिचार्ड के अनुसार नुऐर सूडान में रहते हैं तथा स्वयं को नाथ कहते हैं। वे करीब 20 लाख हैं। वे लंबे, लंबे हाथ-पैर वाले तथा पतले सिर वाले हैं। इवान्स प्रिचार्ड ने अपने अध्ययन के रूप में सूडान की नुरेर जनजाति को चुना व उनके रीति-रिवाजी एवं धर्म पर विस्तृत शोध प्रस्तुत किया।

Sociology of religion:इनका धर्म बहुत जटिल तथा अन्य जनजातीय धर्मों से अलग प्रकार का है। नुऐर ईश्वर को 'क्वौथ' अर्थात् आत्मा कहते हैं। सर्वव्यापक ईश्वर के द्वारा ही संपूर्ण सृष्टि संचालित है. जैसे वर्षा, आकाश, सूर्य, चंद्र आदि। मुरेर लोग ईश्वर को मानवीय रूप में कमी नहीं मानते।

Sociology of religion: वे ईश्वर एवं देवी-देवताओं की आराधना में ग्यानर्योग' शब्द का इस्तेमाल करते हैं, जिसका अर्थ दादा या पूर्वज होता है। वे अपने आपको मूर्ख, कमजोर, अल्पज्ञानी मानते हैं, जिसके लिए दोआर शब्द का प्रयोग करते हैं। नुऐर अनुभव करते हैं कि ईश्वर उनका संरक्षक है तथा मानव ईश्वर पर पूरी तरह निर्भर करता है तथा ईश्वर की सहायता के बिना मजबूर है।

Sociology of religion: ईश्वर यद्यपि मित्र है और वर्तमान भी है तो भी यह मानय प्राणियों से दूर है। प्रिचार्ड ने नुऐर धर्म को वायु संबंधी तथा ईश्वरीय कड़ा है, इसे एकेश्वरवादी कहा जाए यह परिभाषा का विषय है। एक स्तर पर नुऐर धर्म एकेश्वरवादी है जबकि दूसरे स्तर पर बहुदैववादी।

साथ ही साथ इसे टोटमवाद या मूर्तिपूजक भी कहा जा सकता है। अतः इवान्स ने इस जाति के माध्यम से धर्म पर विचार प्रकट किया है, जिसमें प्रेत की अवधारणा, बलि, पाप, पैगम्बर की भूमिका आदि पर इस इकाई में चर्चा की गई है।

Rajasthan