Sociology of religion: टी. एन. मदनः सन्यास हीनता (T. N. Madan: Non-Renunciation) का वर्णन करें ।
Sociology of religion: टी एन मदन का अध्ययन एक नृजातिलेखीय अध्ययन है जिसमें कश्मीरी पडितों के धार्मिक प्रतिमानों का वर्णन है। इस नृजातीय अनुसंधानात्मक अध्ययन में इन्होंने हिन्दू धर्म और समाज पर विशिष्ट परिचर्चा की है।
यह पुस्तक मुख्य रूप से ब्राह्माणों द्वारा धर्म की समझ पर आधारित है क्योंकि ब्राह्माण हिन्दू धर्म के संरक्षक हैं, परंतु यह पुस्तक सपूर्ण हिन्दू समाज के बारे में है।
Sociology of religion: लेखक ने हिन्दू समाज के उपन्यासों की सहायता ली तथा उन्हें समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से समझा, लेखक ने इसे बखूबी समझा है कि हिन्दू समाज में गृहस्थ का जीवन सर्वोच्च मूल्य समझा जाता है। इनकी पुस्तक पाँच अध्यायों में विभाजित है, जिसमें हिन्दू धर्म एवं संस्कृति पर चर्चा है। मदन जी ने 'शुभ' के विचार को पवित्रता के विचार के सबंध में स्पष्ट करने का प्रयास किया है।
Sociology of religion: उनके अनुसार शुभ का अर्थ समय तथा लौकिक घटनाओं से है जो व्यक्तियों की विशिष्ट श्रेणी के संबंध में प्रत्यक्ष जुड़ा है। वैराग्य और वासना के विचार को तीन उपन्यासों की सहायता से समझाया गया है, पहला भगवतीचरण वर्मा का 'चित्रलेखा' है, दूसरा यूआर अनन्थ मूर्थी का कर्नाटक उपन्यास संस्कार जिसे बाद में ए के रामानुजन ने अंग्रेजी में अनुवादित किया था तथा तीसरा विष्णु संग्राम खाण्डेकर का मराठी उपन्यास 'ययाति' जिसे मोरेस्वर तपस्वी ने हिंदी में अनुवाद किया था।
Sociology of religion: इन तीनों कहानियों का वर्णन इस पुस्तक में किया गया है। इस अध्ययन में हिंदुवाद के परंपरागत आधार को इस प्रकार समझा गया है जिस प्रकार आदमी ने वैराग्य के जीवन के विपरीत संसार के जीवन को अच्छा जीवन माना है।
