Sociology of religion : भारत में इस्लाम धर्म पर टिप्पणी करें ।
Sociology of religion : इतिहासकारों व शोधकर्ताओं के अनुसार भारत में इस्लाम धर्म की शुरुমার लगभग एक सहसाब्दि पर्व मानी जाती है. इसका प्रभाव तब शुरू हुआ जब सदी शताब्दी आरंभ में अरव ने सिंध पर विजय प्राप्त की। इसलिए ऐतिहासिक दृष्टि से इस्लाम भारत के एक महत्त्वपूर्ण धर्म है और अत्यंत ही अर्थपूर्ण सांस्कृतिक परंपरा भी है।
Sociology of religion : इस्लाम भारत में द धर्म के साथ-साथ अस्तित्व में रहा है जिसने अपनी अलग परंपरागत विश्व दृष्टि निरूपित के है। इस्लाम के मूल्य सार सामान्य रूप से समग्र थे, वैचारिक रूप से जाति के रूप। असमानता का सिद्धांत स्वीकार नहीं किया गया और इसके अतिन्द्रियता के मूल्य की जां एकेश्वरवाद के सिद्धांत में थीं।
Sociology of religion : इस्लाम सामाजिक असमानता के लिए कोई भी गुंजाइश नहीं रखता है। इस्लामी मत में सक्रिय प्रधान संकल्पना इस बात पर बल देती है कि सभी मनुष्य अल्लाह (सर्वशक्तिमान) सम्मुख समान हैं। यह संकल्पना खालाकुला (सर्वशक्तिमान का जन) प्रचलित है। किं भारतीय मुसलमानों के मामले से पता चलता है कि हिन्दू सामाजिक संरचना असमानता के रूप में इस्लामी मूल्यों के साथ जारी है।
Sociology of religion : विवाह और नातेदारी संबंधों की स्थापना में अशारर सदैव उन लोगों से सामाजिक दूरी बनाए रखते है जो धर्मान्तरित है और उन्हें कभी भी अपन समतुल्य नहीं मानते हैं। धर्मान्तरित लोगों में अभी भी जाति असमानता विद्यमान है। ये अपन परपरागत जाति अनुष्ठान संपन्न करते हैं तथा वे अपनी पीदियों पुरानी परंपरागत व्यवसाय में ही सलग्न है।
Sociology of religion : तथापि, अरब से सिंघ में इस्लामी समुदाय में स्पष्ट विषमजातीयता दृष्टिगोचर होती। वह है सामाजिक असमानता का मामला। भारत का मामला अत्यंत ही विशिष्ट जान पड़ता है क्योंकि भारतीय मुसलमानों में प्रतीत होता है कि जाति जैसी संरचना को अपनी सामाजिक व्यवस्था में स्वीकार कर लिया है। मुसलमानों में पिछड़े वर्ग की मान्यता के लिए विभिन आंदोलन इस तरह की स्वीकार्यता के स्पष्ट द्योतक है। अनेक समाजशास्त्रीय और मानवशास्त्रीय अध्ययनों से भारतीय मुस्लिमों में जाति जैसी संरचना की विद्यमानता का पता चलता है। दूसरी ओर, अन्य अनेक विद्वान जाति को संरचनात्मक अस्तित्व मानते हैं तथा तर्क देते हैं कि हिन्दू सामाजिक संरचना के तत्त्व भारत में मुस्लिम शासन के दौरान बड़े पैमाने पर धर्मान्तरण का परिणाम है।
