https://www.choptaplus.in/

Sociology of religion: विश्व के विभिन्न धर्मों पर वेबर के क्या विचार थे.

हिन्दुत्व का समाजशास्त्र जाति व्यवस्था ने भारत के धर्म को हरी तरह से वर्गीकृत कर रखा था।
 
sociology ऑफ़ religion
 Sociology of religion 

 Sociology of religion:    वेबर ने यह कल्पना की कि पूँजीवाद पश्चिमी सोच का उत्पाद है। वेबर ने संसार धर्मो का तुलनात्मक अध्ययन किया और यह देखने का प्रयास किया कि संसार के धर्मों में कार के या कमी है जो आधुनिक पूँजीवाद के विकास में सहायक नहीं हो सका था,

ऐसा क्या कारण आ कि यह केवल आधुनिक पश्चिमी समाज में ही विकसित हो पाया। इस सदर्भ में विभिन्न रेक र्मों का विकास हुआ है।

(क) चीन का धर्म: कन्फूसी चीन का प्रमुख धर्म कन्फुसियसवाद के प्रति वेबर नवीन नष्कर्ष निकालते हैं। उनका यह मानना है कि इस धर्म में जादू-टोना, टोटका व अंधविश्वास नः सास तरह से विद्यमान है कि यह उसे आधुनिकता से वंचित कर रहा है, अतः यह आधुनिक जाती जीवाद के विकास में बाधक रहा था।

(ख) भारत का धर्म: हिन्दुत्व का समाजशास्त्र जाति व्यवस्था ने भारत के धर्म को हरी तरह से वर्गीकृत कर रखा था। वर्ग, वर्ण, नस्ल, धर्म और सम्प्रदाय के आधार पर माजन यहाँ व्याप्त रहा है, अतः इस जटिल व रुदिग्रस्त समाज के विकास में अत्यंत बाधाएँ । पूँजीवादी शक्त्तियों का उदय अत्यंत कठिन है।

 (ग) प्राचीन यहूदीवाद यहूदियों की उत्पत्ति इस्लाम व ईसाई धर्मों के बीच से हुई है, व्यवसातिः इसका एक अलग सामाजिक, राजनीतिक व सांस्कृतिक इतिहास रहा है। वेबर ने कैम्हूदियों पर अध्ययन करने के पश्चात् यह निष्कर्ष निकाला कि यहूदियों ने एक तार्किक केोर्मिक सत्ता का निर्माण किया,

जिसने पश्चिमी संस्कृति को गहराई से प्रभावित किया, परंतु संन्ह प्यूरीटनवाद के समान तार्किक-आर्थिक व्यवहार तक नहीं पहुँच पाया। यह उसकी अंतिम विसंगत परिणति थी।

Rajasthan