हरियाणा की 20 हजार आशा वर्करों के लिए बड़ी खुशखबरी: कोर्ट फैसले के बाद पक्की नौकरी की बढी उम्मीद
चंडीगढ़। हरियाणा में पिछले 21 सालों से अपनी सेवाएं दे रहीं हजारों आशा वर्करों को पक्का करने की कवायद तेज हो गई है। प्रदेश में इस समय करीब 20 हजार आशा वर्कर स्वास्थ्य विभागों में अपनी सेवाएं दे रही हैं, जिनमें से लगभग 17 हजार वर्कर ऐसी हैं जो 10 साल से भी अधिक का समय पूरा कर चुकी हैं।
इसी सिलसिले में आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा की प्रधान सुनीता, उप प्रधान रानी, सह सचिव सुदेश व अनीता और राज्य कमेटी की सदस्य वंदना ने मंगलवार को राज्य की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव से खास मुलाकात की। यूनियन ने अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) आधार पर बरसों से काम कर रही इन महिलाओं को नियमित करने और सरकारी कर्मचारियों की तरह तमाम सुविधाएं देने की मांग प्रमुखता से उठाई।
यह पूरा मामला हाई कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले के बाद गरमाया है, जिसमें जस्टिस संदीप मौदगिल की बेंच ने 104 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए संविदा कर्मचारियों के हक में फैसला सुनाया था। अदालत ने अपने आदेश में साफ कहा था कि राज्य सरकार संविदा यानी ठेका व्यवस्था की आड़ में अपने कर्मचारियों का अनिश्चितकाल तक शोषण नहीं कर सकती है।
जो कर्मचारी लंबे समय से लगातार अपनी ड्यूटी दे रहे हैं, उनका काम अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी प्रकृति का माना जाएगा। इसलिए सरकार को उन्हें उनकी शुरुआती नियुक्ति की तारीख से ही नियमित करना चाहिए और सारे बैक एरियर व सेवा लाभ देने चाहिए। बता दें कि यह पूरी योजना केंद्र प्रायोजित है, जिसमें 60 फीसदी पैसा केंद्र और 40 फीसदी पैसा राज्य सरकार वहन करती है।
हालांकि, हरियाणा सरकार ने कोर्ट में यह दलील देकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की थी कि उनके पास पक्के पद स्वीकृत नहीं हैं और अदालत खुद नए पद सृजित करने के आदेश नहीं दे सकती। लेकिन हाई कोर्ट ने सरकार की इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अगर कर्मचारियों की भर्ती पूरी पारदर्शिता से हुई है, वे योग्य हैं और बिना किसी अदालती रोक-टोक के सालों से काम कर रहे हैं, तो सरकार उन्हें हमेशा के लिए कच्चा नहीं रख सकती। इसके अलावा यूनियन पदाधिकारियों ने अधिकारियों को 31 दिसंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की याद भी दिलाई, जिसमें 10 साल की सेवा पूरी करने वाले सभी मजदूरों और कर्मचारियों को पक्का करने का आदेश दिया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने आशा वर्करों की इन सभी दलीलों और मांगों के प्रति सहमति जताई है। उन्होंने मौके पर ही मिशन महानिदेशक आरएस ढिल्लो को इस पूरे मामले में विभागीय कार्रवाई शुरू करने और कर्मचारियों को पक्का करने की संभावनाएं तलाशने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य मंत्री के इस सकारात्मक और मजबूत भरोसे के बाद ही आशा वर्कर यूनियन ने राहत की सांस ली और 28 मई को रेवाड़ी में होने वाले अपने बड़े राज्य स्तरीय प्रदर्शन को फिलहाल के लिए टालने का एलान कर दिया।
नौकरी पक्की करने के साथ-साथ आशा वर्करों ने अपनी कई अन्य रुकी हुई मांगों को भी स्वास्थ्य मंत्री के सामने रखा। यूनियन ने मांग की है कि साल 2023 में हुई उनकी 73 दिनों की ऐतिहासिक हड़ताल के दौरान काटा गया मानदेय उन्हें तुरंत वापस दिया जाए। इसके अलावा जननी सुरक्षा योजना और आयुष्मान आरोग्य मंदिर के तहत काटे गए मानदेय को भी बहाल किया जाए। उन्होंने साल 2025 में केंद्र सरकार द्वारा घोषित की गई 1500 रुपये की मानदेय बढ़ोतरी को भी पूरे एरियर के साथ जल्द से जल्द खाते में डालने की बात कही है।
कर्मचारियों की बुनियादी सुविधाओं का जिक्र करते हुए यूनियन ने मांग की है कि सभी आशा वर्कर्स को हर महीने मानदेय के साथ मेडिकल लीव और मैटरनिटी लीव (प्रसूति अवकाश) की पक्की सुविधा मिले। साथ ही पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर महीने मानदेय के भुगतान की स्लिप भी दी जाए। उन्होंने मांग की कि सभी आशा वर्करों और उनके परिवारों को सरकार के पैनल में शामिल बड़े अस्पतालों में मुफ्त और कैशलेस इलाज की सुविधा मिलनी चाहिए और हर बड़े त्योहार के अवसर पर त्योहार भत्ता यानी बोनस भी दिया जाना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री ने इन सभी मांगों को ध्यान से सुना और जल्द ही उचित कदम उठाने का वादा किया है।
