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Haryana News: आयुष्मान-चिरायु क्लेम में धोखाधड़ी पर लगेगी लगाम, लाभार्थियों को मिलेगा बड़ा फायदा

हरियाणा सरकार ने आयुष्मान भारत और चिरायु योजना के क्लेम में धोखाधड़ी रोकने के लिए थर्ड पार्टी ऑडिट अनिवार्य किया। अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने HMSCL को TPA से ऑडिट कराने के निर्देश दिए। राज्य में अब तक 28 लाख क्लेम निपटाए जा चुके हैं।
 
Dr. Sumita Misra chairs review meeting ordering mandatory third party audit for Ayushman Bharat Chirayu scheme claims in Haryana — Ayushman Bharat Chirayu Haryana fraud audit

चंडीगढ़: हरियाणा में आयुष्मान भारत और चिरायु योजना के तहत होने वाले फर्जी दावों पर अब सरकार का शिकंजा कसने वाला है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने चंडीगढ़ में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन लिमिटेड (HMSCL) को थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPA) के जरिए ऑडिट और क्लेम प्रक्रिया संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना के हर स्तर पर थर्ड पार्टी ऑडिट अनिवार्य किया जाएगा ताकि आयुष्मान भारत की प्रक्रिया में कोई धोखाधड़ी न हो। यह आदेश उन अस्पतालों और लाभार्थियों — दोनों के लिए एक कड़ा संदेश है जो योजना का दुरुपयोग करते हैं।

समीक्षा बैठक में बताया गया कि हरियाणा ने आयुष्मान भारत और चिरायु योजना के तहत अब तक लगभग 28 लाख क्लेम निपटाए हैं और लाभार्थियों को 3,900 करोड़ रुपये से ज्यादा की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। वित्त वर्ष 2025-26 में अकेले 1,500 करोड़ रुपये से ज्यादा के क्लेम आ चुके हैं, जो योजना के बढ़ते उपयोग को दर्शाता है — लेकिन साथ ही इसमें गड़बड़ी की आशंका को भी बढ़ाता है।

PGI चंडीगढ़ में फर्जी क्लेम और देशभर में बढ़ते घोटाले 

फरवरी में PGI चंडीगढ़ में फर्जी बिल, जाली दस्तावेज और डिस्चार्ज हो चुके मरीजों के डेटा का इस्तेमाल कर योजना के एक करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम हड़पी गई थी। असम के एक अस्पताल में तो लाभार्थियों को 300 रुपये देकर अस्पताल के बिस्तर पर लिटाकर फोटो खिंचवाई गई और बिना इलाज के 778 फर्जी क्लेम ठोक दिए गए, जिसमें करीब 64 लाख रुपये की धोखाधड़ी हुई। इन्हीं घटनाओं की पृष्ठभूमि में हरियाणा सरकार ने सख्ती बढ़ाने का फैसला किया है। नेशनल हेल्थ अथॉरिटी की एंटी-फ्रॉड यूनिट पहले ही देशभर के निजी अस्पतालों से 2.7 लाख अस्वीकार्य क्लेम पकड़ चुकी है।

डॉ. मिश्रा ने यह भी निर्देश दिया कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों से आयुष्मान भारत के तहत क्लेम कैसे बढ़ाए जाएं, इसके लिए स्पष्ट रणनीति बनाई जाए। किडनी के मरीजों के लिए क्रोनिक हीमोडायलिसिस — जो बार-बार जरूरी होने वाला इलाज है — के लिए भी आयुष्मान भारत के तहत सक्रिय रूप से क्लेम किया जाए ताकि डायलिसिस मरीजों को पैसों की चिंता किए बिना पूरा कवरेज मिले।

1.38 करोड़ कार्डधारकों तक पहुंची योजना, अब जवाबदेही होगी पक्की

राज्य में 1,363 पैनल वाले अस्पतालों का नेटवर्क है — 777 निजी और 586 सरकारी — जो पूरे हरियाणा में लाभार्थियों को कैशलेस इलाज की सुविधा देते हैं। हरियाणा ने 21 नवंबर 2022 को चिरायु योजना शुरू की थी जो 1.80 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले परिवारों को कवर करती थी, और 15 अगस्त 2023 को इसे 3 लाख रुपये तक की आय वाले परिवारों के लिए 1,500 रुपये सालाना योगदान पर बढ़ा दिया गया। अब योग्य लाभार्थियों के 1.38 करोड़ कार्ड बन चुके हैं और हर परिवार को 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिल सकता है।

हरियाणा में आयुष्मान योजना के प्राइवेट अस्पतालों ने दी सेवाएं बंद की चेतावनी, वजह हैरान करने वाली

थर्ड पार्टी ऑडिट लागू होने से अब अस्पतालों को हर क्लेम का पूरा दस्तावेजी हिसाब देना होगा और फर्जी भर्ती या बिना इलाज के दावे करने पर सीधी कार्रवाई होगी। मार्च 2026 में हरियाणा विधानसभा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि क्लेम की प्रक्रिया NHA के TMS पोर्टल पर पूरी तरह पारदर्शी तरीके से ऑनलाइन हो रही है। अब थर्ड पार्टी ऑडिट उस पारदर्शिता को और पुख्ता करेगा और जो लोग इस जन-हितकारी योजना का दुरुपयोग कर रहे थे, उनकी मुश्किलें बढ़ना तय है।
 

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