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हरियाणा की बहू ने पेश की मिसाल: 90 वर्षीय सास को सिर पर उठाकर करवा रही 84 कोस की परिक्रमा

 
हरियाणा की बहू काजल चौधरी अपनी 90 वर्षीय सास को सिर पर प्लास्टिक टब में बैठाकर 84 कोस की परिक्रमा करते हुए

हरियाणा के हताना गांव निवासी एक बहू ने आधुनिक समाज में रिश्तों की एक नई मिसाल पेश की है। पेशे से लोक गायिका काजल चौधरी अपनी 90 वर्षीय सास चन्द्री देवी को एक प्लास्टिक के टब में बैठाकर और उसे अपने सिर पर उठाकर ब्रज की 268 किलोमीटर लंबी 84 कोस परिक्रमा करवा रही हैं। 

शारीरिक कमजोरी के कारण चलने में असमर्थ सास की वर्षों पुरानी धार्मिक इच्छा को पूरा करने के लिए बहू द्वारा उठाए गए इस कदम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। राजस्थान के भरतपुर जिले से गुजरने के दौरान स्थानीय लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया।

braj 84 kos parikrama

काजल चौधरी की सास चन्द्री देवी के मन में ब्रजभूमि की प्रसिद्ध 84 कोस परिक्रमा करने की इच्छा थी, लेकिन अधिक उम्र होने के कारण यह संभव नहीं लग रहा था। जब काजल को अपनी सास की इस अधूरी इच्छा का पता चला, तो उन्होंने इसे हर हाल में पूरा करने का संकल्प लिया। इसके लिए उन्होंने एक बड़े प्लास्टिक टब का इंतजाम किया और उसमें अपनी सास को सुरक्षित रूप से बैठाकर सिर पर उठाकर यह कठिन पैदल यात्रा शुरू कर दी।

परिक्रमा मार्ग पर जहां-जहां से यह सास-बहू की जोड़ी गुजर रही है, वहां के लोग इस अद्भुत सेवा भाव को देखकर भावुक हो रहे हैं। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं द्वारा रास्ते में उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया जा रहा है। ब्रज क्षेत्र में स्थानीय लोग काजल चौधरी की तुलना पौराणिक श्रवण कुमार से कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि आज के दौर में जब पारिवारिक रिश्तों में दूरियां बढ़ रही हैं, तब काजल का यह समर्पण समाज के लिए एक बड़ा और सकारात्मक संदेश है।

kajal choudhary folk singer haryana

अपनी प्रेरणा को लेकर काजल का कहना है कि उनकी सास ने विवाह के बाद से ही उन्हें बहू नहीं बल्कि एक बेटी की तरह प्यार और सम्मान दिया है। परिवार से मिले इसी स्नेह के कारण वह खुद को सौभाग्यशाली मानती हैं। उनका मानना है कि माता-पिता और बुजुर्गों की इच्छाओं का सम्मान करना तथा उनकी सेवा करना हर संतान का प्राथमिक कर्तव्य है। यही विचार उन्हें 84 कोस की इस दुर्गम यात्रा को पूरा करने की शक्ति दे रहा है।

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ब्रज की 84 कोस परिक्रमा हिंदू धर्म की सबसे पवित्र यात्राओं में गिनी जाती है, जो उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा के करीब 1200 गांवों से होकर गुजरती है। लगभग 252 से 268 किलोमीटर लंबी इस यात्रा में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थली मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और नंदगांव सहित प्रमुख मंदिरों, कुंडों और वनों के दर्शन करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस परिक्रमा को पूरी करने से 84 लाख योनियों के चक्र से मुक्ति और विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। मोक्ष और गहरी आस्था का प्रतीक मानी जाने वाली यह यात्रा बड़ी संख्या में भक्तों द्वारा नंगे पैर पूरी की जाती है।
 

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