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Haryana Scheme: हरियाणा में 2 पशुओं की डेयरी खोलने पर 50% की सब्सिडी, जानें पूरी डिटेल

 
हरियाणा में अनुदान पर डेयरी और पशुपालन इकाई स्थापित करने वाले किसानों और युवाओं की प्रतीकात्मक तस्वीर।

हरियाणा पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए एक अहम पहल की है। अनुसूचित जाति के लाभार्थियों को पशुपालन इकाइयां स्थापित करने पर सरकार की तरफ से भारी अनुदान दिया जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को सशक्त बनाना और गांव स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। सरकार की इस पहल से ग्रामीण अंचल में पशुपालन को एक बड़े व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकेगा।

भेड़-बकरी पालन व डेयरी इकाई पर बंपर छूट

विभाग की तरफ से अलग-अलग पशुपालन इकाइयों पर वित्तीय सहायता तय की गई है। दो दुधारू पशुओं की डेयरी खोलने पर कुल लागत का 50 प्रतिशत सीधा अनुदान मिलेगा। इसी तरह 10+1 सूअर इकाई स्थापित करने पर भी 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 50 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। वहीं, 15+1 भेड़-बकरी पालन इकाई के लिए सरकार 90 प्रतिशत तक का बंपर अनुदान दे रही है। इसमें लाभार्थी को अधिकतम 88,200 रुपये तक की आर्थिक मदद सीधे तौर पर मिलेगी।

बिना शैक्षणिक योग्यता के करें आवेदन

योजना के लाभ और इसकी शर्तों को स्पष्ट करते हुए पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उप निदेशक डा. सुखविंद्र सिंह ने बताया कि इस योजना के लिए 18 से 60 वर्ष तक के युवा आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता या ट्रेनिंग की शर्त नहीं रखी गई है, जिससे ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद इसका लाभ उठा सकें। उप निदेशक ने बताया कि आवेदन के लिए परिवार पहचान पत्र, अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र, बैंक खाते का विवरण और एक रद्द किया हुआ चेक विभाग में जमा करवाना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह योजना न केवल बेरोजगारों को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी संजीवनी देगी।

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पशुओं का बीमा और जगह होना अनिवार्य

योजना में भले ही पढ़ाई की शर्त न हो, लेकिन आवेदक के पास पशुओं को सुरक्षित रखने और उनके चारे-पानी के लिए पर्याप्त जगह का होना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही, विभागीय नियमों के मुताबिक अनुदान पर लिए गए पशुओं का बीमा करवाना अनिवार्य किया गया है। पशुओं की मौत या किसी अप्रत्याशित नुकसान से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है, जिसका प्रीमियम लाभार्थी को स्वयं वहन करना होगा।
 

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