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सोलर पंप के नाम पर फंसे किसानों के 170 करोड़, 3 महीने से रिफंड के लिए काट रहे दफ्तरों के चक्कर

ना सोलर पंप मिला, ना पैसे वापस... हरियाणा के किसान 3 महीने से खा रहे दफ्तरों के धक्के
 
Angry Haryana farmers protesting and demanding refund for PM Kusum Yojana solar water pump scheme

हरियाणा में सोलर वॉटर पंपिंग सिस्टम के लिए आवेदन करने वाले करीब 20 हजार किसान इन दिनों सरकारी दफ्तरों के धक्के खाने को मजबूर हैं। किसानों ने दिसंबर 2025 में करोड़ों रुपये जमा करवाए थे, लेकिन ना तो उन्हें सोलर कनेक्शन मिला और ना ही तीन महीने बीत जाने के बाद उनकी रकम वापस लौटाई जा रही है। इस बड़ी लापरवाही के खिलाफ भारतीय किसान एकता (BKE) ने मोर्चा खोलते हुए सिरसा के अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) को ईमेल भेजकर तुरंत रिफंड की मांग की है।

8050 को कनेक्शन, बाकी का क्या?

प्रदेश भर में सोलर पंप लगवाने को लेकर किसानों में भारी उत्साह था। हरियाणा में कुल 27,973 किसानों ने सोलर पंप के लिए आवेदन किया था। सरकार ने इनमें से महज 8,050 किसानों को सोलर वॉटर पंपिंग सिस्टम लगाने का वर्क ऑर्डर जारी किया।

बाकी बचे 19,923 किसानों को न तो कनेक्शन की लिस्ट में जगह मिली और न ही उनका पैसा लौटाया गया। आंकड़ों के मुताबिक, इन किसानों की लगभग 170 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि पिछले तीन महीनों से सरकार के पास अटकी हुई है। सिरसा जिले के भी हजारों किसान इस फेहरिस्त में शामिल हैं।

लाखों रुपये जमा कर फंसे किसान

किसानों ने अपनी जरूरत के हिसाब से 3 एचपी से लेकर 10 एचपी तक के डीसी सोलर वॉटर पंपिंग सिस्टम के लिए अप्लाई किया था। उदाहरण के तौर पर, 10 एचपी सिस्टम के लिए किसानों ने 1,09,924 रुपये की एकमुश्त रकम जमा करवाई थी।

बीकेई के प्रदेशाध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने बताया कि जिन किसानों का नाम वर्क ऑर्डर में नहीं आया, उन्होंने बाकायदा अपनी जमा राशि वापस लेने के लिए आवेदन भी दिया है। बावजूद इसके, विभाग पेमेंट वापसी के नाम पर किसानों को सिर्फ चक्कर कटवा रहा है।

नई स्कीम में मिले प्राथमिकता

सिरसा के झोरड़ रोही गांव में आयोजित किसानों की एक अहम बैठक के बाद प्रशासन को यह मांग पत्र भेजा गया। इस बैठक में नत्था सिंह, पूर्व सरपंच नछत्तर सिंह, दर्शन सिंह, संदीप सिंह समेत कई किसान मौजूद रहे।

औलख ने प्रशासन से स्पष्ट कहा है कि जब तक साल 2026 में पीएम कुसुम योजना के तहत सोलर कनेक्शन की नई स्कीम नहीं आती, तब तक सभी वंचित किसानों का पैसा उनके बैंक खातों में तुरंत ट्रांसफर किया जाए। इसके साथ ही, नई स्कीम आने पर दिसंबर 2025 के इन बचे हुए आवेदकों को ही सबसे पहले प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

अन्नदाता पहले ही मौसम और मंडी की मार झेल रहा है, ऐसे में सरकारी सिस्टम की यह लेटलतीफी उनके सब्र का कड़ा इम्तिहान ले रही है।
 

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