हरियाणा सरकार ने ग्रुप-डी कर्मचारियों की कर दी मौज, प्रमोशन कोटा बढ़ाकर 30% किया गया
चोपटा: हरियाणा सरकार ने प्रदेश के हजारों ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी का ऐलान किया है। बुधवार को गुरुग्राम स्थित पीडब्लूडी रेस्ट हाउस में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया। अब कॉमन कैडर के उन ग्रुप-डी कर्मचारियों को क्लर्क पद पर प्रमोशन का रास्ता साफ हो गया है, जिन्होंने पांच साल से अधिक की सेवा पूरी कर ली है। इसके लिए प्रमोशन कोटे को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने का प्रावधान किया गया है।
कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि इस बिल का मसौदा तैयार कर लिया गया है। ‘हरियाणा क्लेरिकल सर्विसेज़ (रिक्रूटमेंट एंड कंडीशंस ऑफ सर्विस) बिल-2026’ को आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि जो कर्मचारी पांच साल से अधिक समय से सेवा दे रहे हैं, वे अब क्लर्क बनने के लिए पूरी तरह योग्य हैं। सरकार का मानना है कि इस फैसले से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और प्रशासनिक व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
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— CMO Haryana (@cmohry) April 22, 2026
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पिछली व्यवस्था के तहत ग्रुप-डी से क्लर्क बनने का सीधा रास्ता नहीं था। क्लर्क पदों पर ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए केवल 20 प्रतिशत का कोटा निर्धारित था, जिससे तमाम योग्य कर्मचारी सालों तक एक ही पद पर अटके रहते थे। अब नए प्रस्ताव के अनुसार यह कोटा बढ़ाकर 30 प्रतिशत किया जा रहा है, यानी हर 10 में से 3 पद अब प्रमोशन के जरिए भरे जाएंगे। इसके अलावा, सरकार ने नियमों में 5 प्रतिशत एक्स-ग्रेशिया पद रखने की अनिवार्यता भी शामिल की है।
नए बिल के तहत प्रमोशन के लिए मुख्य शर्तें इस प्रकार होंगी:
- न्यूनतम सेवा अवधि: कॉमन कैडर के ग्रुप-डी कर्मचारियों का पांच साल से अधिक का सेवाकाल होना चाहिए।
- प्रमोशन कोटा: क्लर्क के पद पर सीधी भर्ती के सापेक्ष प्रमोशन का कोटा अब 30% कर दिया गया है।
- एक्स-ग्रेशिया प्रावधान: नए नियमों में कुल पदों का 5% हिस्सा एक्स-ग्रेशिया (अनुग्रह) कोटे के तहत रखा जाएगा, जिससे अधिक कर्मचारियों को लाभ मिल सकेगा।
इन सबसे अहम फैसलों को अमलीजामा पहनाने के लिए अब 27 अप्रैल को हरियाणा विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है। इस सत्र का मुख्य एजेंडा ‘हरियाणा क्लेरिकल सर्विसेज बिल-2026’ को पेश करना और पारित कराना होगा। सरकार का दावा है कि इस बिल के पास होते ही प्रदेश के हजारों ग्रुप-डी कर्मचारियों के करियर को नई उड़ान मिलेगी, जो लंबे समय से प्रमोशन की मांग कर रहे थे।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस दौरान राष्ट्रीय राजनीति पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 16 और 17 अप्रैल को संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पास न होने के लिए विपक्ष जिम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने इस बिल का विरोध कर महिलाओं का अपमान किया है, जिससे विपक्ष का ‘महिला विरोधी’ चेहरा उजागर हुआ है। सीएम सैनी ने कहा कि सरकार सत्र के दौरान इसी मुद्दे पर निंदा प्रस्ताव भी ला सकती है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उसके शासन में महिलाओं को दूर-दूर से पानी ढोना पड़ता था, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने हर घर में नल से जल पहुंचाया। साथ ही, उन्होंने 2015 में पानीपत से शुरू किए गए ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीति पर लगाम लगी है।
