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हरियाणा: छोटे मामलों में सालों से जेल में बंद कैदियों के लिए 'संजीवनी' बनी लोक अदालत, ऑन-द-स्पॉट मिल रही रिहाई!

जेल के अंदर ही लग गई कोर्ट! जानिए कैसे 'लोक अदालत' से मिनटों में सुलझ रहे हैं बंदियों के पेंडिंग केस?
 
 
हरियाणा की जिला जेल में विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित लोक अदालत में कैदियों के मामलों की सुनवाई करते हुए अधिकारी।

हरियाणा की जेलों में छोटे-मोटे मामलों के चक्कर में बंद कैदियों के लिए एक बेहद सुकून देने वाली खबर है। हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों पर शुक्रवार को स्थानीय जिला जेल के अंदर ही एक 'विशेष लोक अदालत' लगाई गई। इस इन-हाउस कोर्ट का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि मामलों की सुनवाई तुरंत हुई और एक बंदी को मौके पर ही रिहाई मिल गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव और CJM प्रवेश सिंगला ने बताया कि इस पहल का मुख्य टारगेट उन गरीब और मजबूर कैदियों को जल्द से जल्द न्याय दिलाना है, जो मामूली अपराधों के कारण लंबे समय से सलाखों के पीछे अपनी जिंदगी काट रहे हैं।

3 फाइलें खुलीं, 1 को मिली तुरंत आजादी

अदालतों में पेंडिंग केसों की लंबी लाइन किसी से छिपी नहीं है। लेकिन जेल लोक अदालत का कॉन्सेप्ट बिल्कुल अलग और फास्ट है। शुक्रवार को आयोजित हुई इस अदालत में कुल 3 मामलों की फाइलें जज के सामने पेश की गईं। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद, मौके पर ही एक केस को हमेशा के लिए सुलझा दिया गया। सबसे अच्छी बात यह रही कि फैसला होते ही उस बंदी को जेल से तुरंत रिहा करने के आदेश दे दिए गए, जिससे वह अपने परिवार के पास वापस लौट सका।

हर महीने दो बार लगता है 'न्याय का दरबार'

CJM प्रवेश सिंगला ने आम जनता और कैदियों के परिवारों को एक बहुत ही काम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कोई एक दिन का इवेंट नहीं है, बल्कि जेल के अंदर लोक अदालत लगाने का काम एक रूटीन प्रोसेस है। हर महीने के पहले और तीसरे बुधवार को जेल परिसर में ही यह अदालत लगाई जाती है। इसका सीधा सा मतलब है कि महीने में दो बार कैदियों के पास बिना किसी भारी वकील की फीस दिए अपने छोटे मामलों को निपटाने का पक्का मौका होता है।

गरीबों के लिए क्यों है यह वरदान?

कई बार ऐसा होता है कि किसी व्यक्ति पर कोई छोटा-मोटा चार्ज लगता है, लेकिन कानूनी जानकारी की कमी और वकील की फीस न दे पाने के कारण वह सालों तक जेल में ही पड़ा रहता है। यह लोक अदालत ऐसे ही लोगों के लिए एक वरदान साबित हो रही है। इससे न सिर्फ जेलों में भीड़ कम हो रही है, बल्कि कोर्ट का कीमती समय भी बच रहा है।
 

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