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हरियाणा में 1 अक्टूबर से नो पीयूसीसी, नो फ्यूल नीति लागू, इन वाहनों को नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल

 
Haryana implementing No PUCC No Fuel policy at petrol pumps in NCR to control air pollution

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। राज्य सरकार आगामी 1 अक्टूबर से एनसीआर में शामिल हरियाणा के सभी जिलों में “नो पीयूसीसी, नो फ्यूल” (No PUCC, No Fuel) नीति को पूरी तरह से लागू करने जा रही है।

इस नई नीति के लागू होने के बाद, यदि किसी वाहन चालक के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) नहीं है, तो उसे पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा। यह नियम एनसीआर में आने वाले हरियाणा के सभी 2780 पेट्रोल पंपों पर सख्ती से लागू किया जाएगा।

इस व्यवस्था को पारदर्शी और बिना किसी मानवीय दखल के लागू करने के लिए पेट्रोल पंपों पर अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। सरकार सभी पेट्रोल पंपों पर आटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) सिस्टम स्थापित कर रही है। यह सिस्टम पेट्रोल पंप पर आते ही गाड़ी की नंबर प्लेट को सीधे स्कैन कर लेगा और बता देगा कि वाहन का पीयूसी वैध है या नहीं।

सोमवार को प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर की अध्यक्षता में एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों की एक अहम समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने राज्य की इस तकनीक आधारित 'क्लीन एयर' कार्ययोजना का विस्तृत ब्योरा पेश किया।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने बताया कि पेट्रोल पंपों की सख्ती के साथ-साथ सरकार सार्वजनिक परिवहन को भी पूरी तरह इको-फ्रेंडली बनाने जा रही है। इस साल एनसीआर के प्रमुख शहरों में 925 इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि डीजल बसों से होने वाले धुएं को खत्म किया जा सके।

इन 925 बसों में से 575 इलेक्ट्रिक बसों के खरीद आदेश जारी भी किए जा चुके हैं। ये बसें विशेष रूप से गुरुग्राम, फरीदाबाद, पानीपत, करनाल, रोहतक और सोनीपत जैसे उच्च प्रदूषण वाले शहरों में दौड़ेंगी।

वाहनों के धुएं के साथ-साथ पुराने खटारा वाहनों पर भी हरियाणा सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य सचिव ने बताया कि कबाड़ हो चुके (एंड-ऑफ-लाइफ) वाहनों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है। इसके तहत अब प्रतिदिन कम से कम 100 ऐसे पुराने वाहनों को जब्त करने का कड़ा लक्ष्य रखा गया है।

इसके अतिरिक्त, सड़कों पर उड़ने वाली धूल और निर्माण कार्य के मलबे से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए भी नई तकनीक का इस्तेमाल होगा। अब मलबा फेंकने वाले वाहनों पर जीपीएस ट्रैकिंग और जियो टैगिंग के जरिए नजर रखी जाएगी। हरियाणा सरकार का लक्ष्य सर्दियों का स्मॉग शुरू होने से पहले ही इन सभी सिस्टमों को ग्राउंड पर पूरी तरह एक्टिव करना है।

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