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जींद में 14 दिनों से चल रहा किसानों का धरना खत्म, इस दिन चंडीगढ़ में बड़ी महापंचायत का ऐलान

जींद की नई अनाज मंडी में मंडी नियमों और फसल खरीद व्यवस्था को लेकर 14 दिनों से चल रहा किसानों का अनिश्चितकालीन धरना राकेश टिकैत की अपील पर मंगलवार को समाप्त हो गया। इस दौरान टिकैत ने चंडीगढ़ में बड़ी महापंचायत बुलाने की घोषणा की और किसानों को 27 मई के कोडवर्ड के साथ नए आंदोलन की तैयारी करने के निर्देश दिए।
 
Rakesh Tikait addressing farmers in Jind announcing Chandigarh mahapanchayat

Haryana News: नई अनाज मंडी मार्केट कमेटी कार्यालय जींद में भारतीय किसान यूनियन का चल रहा अनिश्चितकालीन धरना मंगलवार को 15वें दिन समाप्त कर दिया गया। यह फैसला भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत की अपील के बाद लिया गया, जो स्वयं धरना स्थल पर पहुंचे थे। टिकैत ने किसानों को आंदोलन को अगले चरण में ले जाने का ऐलान किया और चंडीगढ़ में बड़ी महापंचायत करने की घोषणा की, जिससे किसान आंदोलन अब जींद से सीधे चंडीगढ़ की ओर रुख करेगा।

टिकैत के धरना स्थल पर पहुंचने के बाद उन्होंने धरना स्थल पर बनी 10 सदस्यीय कमेटी के साथ बंद कमरे में लगभग आधे घंटे तक रणनीतिक मंथन किया। बैठक के बाद मंच से संबोधित करते हुए टिकैत ने कहा, "अब समय आ गया है कि किसान अपने आंदोलन को और मजबूत करते हुए चंडीगढ़ की ओर कूच करें।" उन्होंने स्पष्ट किया कि महापंचायत की तिथि की औपचारिक घोषणा जल्द की जाएगी, जबकि संकेत देते हुए 27 मई को बड़ी बैठक का कोडवर्ड भी साझा किया। टिकैत ने किसानों को निर्देश दिए कि चंडीगढ़ कूच से पहले प्रदेश के सभी जिलों में बैठकें आयोजित कर रणनीति तैयार की जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान इस आंदोलन से जुड़ सकें।

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यह धरना मुख्य रूप से मंडी संबंधी नियमों, फसल खरीद व्यवस्था और किसानों-आढ़तियों की मांगों को लेकर चल रहा था। सरकार की ओर से लागू किए गए फसल खरीद के नए नियमों के विरोध में 21 अप्रैल को ही भाकियू कार्यकर्ताओं ने मार्केट कमेटी कार्यालय के गेट को तीन घंटे के लिए बंद कर दिया था, जिसके बाद फसल खरीद का काम ठप हो गया था। किसानों का आरोप था कि नए नियमों से उनका शोषण हो रहा है और ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल में बार-बार आ रही गड़बड़ियों के कारण उनकी फसलें मंडियों में नहीं बिक पा रही हैं। इसके अलावा, किसान मौसमी बारिश और ओलावृष्टि से हुई फसलों की क्षति का मुआवजा और मंडी परिसर में किसानों के लिए उचित सुविधाओं की भी मांग कर रहे थे। टिकैत ने सरकार पर आरोप लगाया कि "किसानों की मांगों को लेकर संवाद की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है" और बताया कि "मुख्यमंत्री से मिलने के लिए समय मांगा गया था, लेकिन उचित समय और स्थान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई।"

राकेश टिकैत ने किसानों को साफ निर्देश दिया कि "यदि चंडीगढ़ जाते समय कहीं भी पुलिस किसानों को रोकती है, तो किसान वहीं अपना डेरा डालकर धरना शुरू कर देंगे।" इसके साथ ही उन्होंने कहा कि महापंचायत के बाद आंदोलन की दिशा तय की जाएगी और अगर सरकार ने उनकी बात नहीं मानी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। टिकैत की इस घोषणा के बाद जींद में मौजूद सैकड़ों किसान अब चंडीगढ़ कूच की तैयारियों में जुट गए हैं। धरना समाप्त होने की सूचना मिलते ही मौके पर मौजूद किसानों ने जयकारे लगाए और राकेश टिकैत के आह्वान पर चंडीगढ़ चलने के लिए तैयार हो गए।

इस अवसर पर टिकैत ने पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि "किसान आंदोलन के समय अगर दुष्यंत पद का त्याग करके किसानों के साथ आ जाते, तो किसान उन्हें तभी मुख्यमंत्री बना देते।" उन्होंने आगे कहा, "दुष्यंत चौटाला को पहले अपने परिवार को इकट्ठा करना पड़ेगा। पहले उनका परिवार इकट्ठा हो जाए, फिर किसानों के बीच आएं।" इस कार्यक्रम में भाकियू के जिलाध्यक्ष बिंद्र नंबरदार, महासचिव राजेंद्र पहलवान, रामराजी ढुल, सतेंद्र कोथ, गुरनाम, प्रकाश लोहान, जयबीर, जोगिंद्र नैनए अजमेर और सुरेश कोथ मौजूद रहे। फिलहाल किसान नेताओं का फोकस पूरी तरह से 27 मई की संभावित महापंचायत को सफल बनाने पर है, जिसमें हरियाणा और पड़ोसी राज्यों के हजारों किसानों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।
 

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