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हरियाणा में महिला आरक्षण पर क्यों है बवाल, जाने किन विधानसभा सीटों पर बदल जाएंगे समीकरण?

 
Haryana Vidhan Sabha building with women legislators demanding reservation — महिला आरक्षण हरियाणा विधानसभा 33 percent

चंडीगढ़/सिरसा: भारत की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आया है। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने 16 अप्रैल 2026 से 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (संविधान का 106वां संशोधन) को पूरे देश में लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है — इसके तहत लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई यानी 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों पर इसका क्या असर पड़ेगा और किन-किन दिग्गज नेताओं की 'सुरक्षित' सीट खतरे में आ सकती है?

गणित सीधा है — लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने के लिए परिसीमन आयोग बनाया जाएगा, जो यह तय करेगा कि कुल सीटों में से कितनी महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी और हर चुनाव के बाद आरक्षित सीटों का रोटेशन कैसे होगा। हरियाणा की 90 सीटों में से 33% यानी 30 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हो सकती हैं। 2024 में सिर्फ 13 महिला MLA जीती थीं — यानी 17 और सीटें अब महिला उम्मीदवारों के पास जाएंगी।

2024 में सिर्फ 13 महिला MLA — लेकिन 30 सीटें चाहिए, यह फर्क कहां से आएगा?

2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में 101 महिला उम्मीदवार मैदान में थीं और 13 महिला MLA चुनी गईं — BJP ने 10 महिलाओं को टिकट दिया जिसमें से 5 जीतीं, और कांग्रेस ने 12 महिलाओं को टिकट दिया जिसमें से 7 जीतीं। एक निर्दलीय महिला भी विधानसभा पहुंची। इसके मुकाबले 30 सीटों की जरूरत का मतलब है कि मौजूदा विधायकों की 17 परिचित और मजबूत सीटों पर अब पुरुष उम्मीदवार नहीं उतर सकेंगे।

2024 में जो 13 महिला MLA जीतीं उनमें BJP की ऋतु चौधरी (तोशाम), आरती सिंह (अटेली), शक्ति रानी शर्मा (कालका), कृष्णा गहलावत (राई), बिमला चौधरी (पटौदी) और कांग्रेस की विनेश फोगाट (जुलाना), गीता भुक्कल (झज्जर), शैली चौधरी (नारायणगढ़), शकुंतला खटक (कलानौर), पूजा (मुलाना), रेनू बाला (सढौरा), मंजू चौधरी (नांगल चौधरी) और निर्दलीय सावित्री जिंदल (हिसार) शामिल हैं। ये 13 सीटें तो पहले से 'महिला टेरिटरी' में हैं — लेकिन 17 और सीटों पर रोटेशन सिस्टम के तहत किसे हटना होगा, यही असली सवाल है।

किन VVIP सीटों पर फंसेगा पेंच — और किन दिग्गजों की बढ़ेगी मुश्किल?

केंद्र सरकार एक साथ तीन विधेयक ला रही है — एक परिसीमन आयोग के गठन से जुड़ा है जो सीटों की नई सीमाएं तय करेगा। परिसीमन के बाद ही महिला आरक्षण पूरी तरह लागू हो सकेगा। सरकार के अनुसार महिलाओं को 33% आरक्षण का लाभ 2026-27 की जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही मिलेगा, जिसका मतलब है कि यह व्यवस्था संभवतः 2029 के आम चुनाव से ही पूरी तरह लागू होगी।

हरियाणा के नजरिए से देखें तो अगर रोटेशन फॉर्मूले पर 30 सीटें आरक्षित हों, तो अंबाला, करनाल, रोहतक, हिसार, सिरसा, भिवानी जैसे जिलों की VVIP जनरल सीटें — जहां दिग्गज पुरुष नेता दशकों से जीतते आए हैं — रिजर्व हो सकती हैं। इस आरक्षण के लिए पहले जनगणना होगी, फिर परिसीमन होगा — उसके बाद यह तय होगा कि कौन सी 30 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व होंगी। जो 17 नई सीटें रिजर्व होंगी, उन पर जीतते आ रहे पुरुष विधायकों को या तो सीट बदलनी होगी या महिला उम्मीदवार को आगे करना होगा। हरियाणा की राजनीति में यह बदलाव भूचाल से कम नहीं होगा।
 

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