https://www.choptaplus.in/

हरियाणा में 16 अप्रैल को प्रदेशव्यापी धरने का ऐलान, जाने क्या है मांग

 
Haryana police standing near workers protesting in Manesar IMT area on April 16

हरियाणा/गुड़गांव: सीटू (सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस) ने मानेसर में हुए श्रमिक आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए 16 अप्रैल को प्रदेशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया है। ट्रेड यूनियन के इस आंदोलन का मुख्य उदेश्य जेल में बंद अपने 55 मजदूर नेताओं की रिहाई के अलावा न्यूनतम मजदूरी का दायरा 23,196 रुपये तय करने और पुराने मामलों में मृत मजदूरों के परिवारों को मुआवजा दिलवाना हैं।

यह प्रदर्शन मानेसर के आईएमटी क्षेत्र में 9 अप्रैल को हुई हिंसा का नतीजा है। पुलिस ने सीटू के अनुसार 55 मजदूरों को गिरफ्तार किया था, जिनमें 20 महिलाएं भी शामिल थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा पुलिस ने सीटू के प्रदेश महासचिव जय भगवान और उपाध्यक्ष विनोद कुमार को नोटिस जारी कर चेतावनी दी है। पुलिस का कहना है कि अगर इस आंदोलन के दौरान कोई अपराध होता है तो कानूनी कार्रवाई होगी।

क्या है मानेसर हिंसा और मजदूरों की गिरफ्तारी का पूरा मामला?

9 अप्रैल को आईएमटी मानेसर में मजदूर कंपनियों में न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। यह प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसमें मजदूरों ने पुलिस वाहनों में आग लगा दी और पथराव किया। पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज कर 55 लोगों को गिरफ्तार किया। पहले मामले में हत्या की कोशिश और दंगे जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। दूसरे मामले में 44 लोगों पर तोड़फोड़ का आरोप है। पुलिस ने दावा किया कि सीसीटीवी फुटेज से इनकी पहचान हुई। हालांकि, मजदूरों के लिए मुश्किल यह है कि उनमें से कई हरियाणा के बाहर के रहने वाले हैं और उनके पास जमानत के लिए गारंटर नहीं है।

इसके अलावा, पुलिस ने 13 अप्रैल को छह और लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, ये लोग किसी कंपनी से जुड़े नहीं हैं और बेरोजगार हैं। इन पर व्हाट्सएप चैट के जरिए हिंसा की साजिश रचने का आरोप है। इनमें रोहतक का आकाश कुमार, उत्तराखंड के हरीश चंद और राजू सिंह, बिहार के पिंटू कुमार यादव, उत्तर प्रदेश के श्यामबीर और हरियाणा के अजीत सिंह शामिल हैं। पुलिस ने आरोप लगाया है कि इन बाहरी तत्वों ने मजदूरों को भड़काकर हिंसा करवाई।

Noida Protest Reason: क्यों सुलग उठा नोएडा? हरियाणा और यूपी के वेतन का वो अंतर जिसने मचाया बवाल

सरकार ने की 15 हजार की घोषणा, मजदूरों की मांग है 23 हजार

सीटू की अध्यक्ष अनीता, जिला सचिव सुनीता और कोषाध्यक्ष सिल्क राम मलिक ने आरोप लगाया कि सरकार मालिकों के हितों की रक्षा कर रही है। उन्होंने बताया कि कारखानों में मजदूरों से बिना ओवरटाइम के 12 से 14 घंटे काम लिया जा रहा है और साप्ताहिक अवकाश भी नहीं मिल रहा। ट्रेड यूनियनों और मालिकों के बीच 29 दिसंबर 2025 को पानीपत में हुई बैठक में 23,196 रुपये मासिक न्यूनतम मजदूरी तय करने पर सहमति बन गई थी, लेकिन सरकार ने 2 मार्च के बजट भाषण में मात्र 15,220 रुपये की घोषणा की। मजदूरों का कहना है कि बढ़ती महंगाई, किराए और रोजमर्रा की चीजों के दामों को देखते हुए यह राशि नाकाफी है। सीटू ने सरकार से झूठे मुकदमे रद्द करने, गिरफ्तार मजदूरों की रिहाई, न्यूनतम वेतन लागू करने और मृत मजदूरों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है। सीटू ने सभी मजदूरों से 16 अप्रैल को इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।

Rajasthan