हरियाणा में निजी स्कूल खोलना अब और आसान, सिर्फ 15 दिन में मिलेगी अनुमति।
निजी शिक्षण संस्थानों की स्थापना प्रक्रिया होगी पारदर्शी और त्वरित

हरियाणा सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा सुधार करते हुए निजी स्कूल खोलने की प्रक्रिया को सरल और तेज बना दिया है। अब राज्य में कोई भी इच्छुक व्यक्ति केवल 15 दिनों में प्राइवेट स्कूल खोलने की अनुमति प्राप्त कर सकेगा और 45 दिनों में मान्यता मिल जाएगी।
यह बदलाव प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने और प्रशासनिक प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
सेवा का अधिकार अधिनियम में शामिल हुई माध्यमिक शिक्षा विभाग की सेवाएं
हरियाणा सरकार ने सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत माध्यमिक शिक्षा विभाग की तीन मुख्य सेवाओं को शामिल किया है:
निजी स्कूल खोलने की अनुमति – 15 दिन में
स्कूल की मान्यता – 45 दिन में
अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) – 30 दिन में
यह NOC भिवानी बोर्ड, CBSE दिल्ली या अन्य शिक्षा बोर्ड से संबद्धता के लिए आवश्यक होता है।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा इन नियमों को अधिसूचित किया गया है। साथ ही शिकायत निवारण के लिए तीन स्तर बनाए गए हैं:
पदाभिहित अधिकारी: निजी विद्यालय शाखा का शाखा अधिकारी
प्रथम शिकायत निवारण प्राधिकारी: संयुक्त/अपर निदेशक (प्रशासन)
द्वितीय शिकायत निवारण प्राधिकारी: निदेशक, माध्यमिक शिक्षा
अनुबंधित महिला शिक्षकों को हर महीने मिलेगा एक अतिरिक्त अवकाश
हरियाणा सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक अहम कदम उठाया है। अब राजकीय विद्यालयों में कार्यरत महिला अनुबंधित शिक्षकों और कर्मचारियों को हर माह एक अतिरिक्त आकस्मिक अवकाश (CL) मिलेगा। यह अवकाश उनके मौजूदा 10 दिनों के चिकित्सा अवकाश के अलावा होगा।
महत्वपूर्ण बिंदु:
महिला अनुबंधित कर्मचारी हर महीने दो CL ले सकेंगी।
एक कैलेंडर वर्ष में अधिकतम 22 CL की सीमा रखी गई है।
यह नियम आउटसोर्सिंग पॉलिसी पार्ट-2 और हरियाणा कौशल रोजगार निगम के तहत कार्यरत महिलाओं पर भी लागू होगा।
नए बदलावों से क्या होगा लाभ?
निजी शिक्षण संस्थानों की स्थापना प्रक्रिया होगी पारदर्शी और त्वरित
ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में शिक्षा सुविधाओं का विस्तार
महिला कर्मचारियों को कार्यस्थल पर बेहतर संतुलन
शिकायत समाधान प्रणाली होगी प्रभावी और जवाबदेह
हरियाणा सरकार द्वारा उठाए गए ये कदम शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक परिवर्तन की ओर संकेत करते हैं। इससे न सिर्फ नई शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना में तेजी आएगी, बल्कि महिला शिक्षकों के लिए कार्य स्थितियां भी बेहतर होंगी। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और उत्तरदायी बनाने की दिशा में यह एक बड़ा और स्वागत योग्य फैसला है।