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जाने क्या है स्टिल्ट प्लस 4’ पॉलिसी, जिस पर Punjab Haryana High Court ने रोक लगाकर अवैध अतिक्रमण हटाने के आदेश दे दिए

 
Diagram showing stilt parking floor with four residential floors above on a single plot in Haryana — Stilt Plus 4 Policy Haryana

चंडीगढ़: इन दिनों हरियाणा में 'स्टिल्ट प्लस 4' पॉलिसी चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल 2026 को मुख्य न्यायाधीश शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ के जरिए इस पॉलिसी पर अंतरिम रोक लगाई और अब पूरे प्रदेश में अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू हो गया है। राज्य सरकार ने 16 अप्रैल को नया सख्त आदेश जारी करते हुए HSVP, नगर निकाय और सभी संबंधित विभागों को रिहायशी कॉलोनियों और सेक्टरों में सड़कों के दोनों तरफ अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं और 22 अप्रैल 2026 तक कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) मांगी है। लेकिन पहले यह समझते हैं कि यह पॉलिसी थी क्या और इस पर विवाद क्यों हुआ?

सरल भाषा में समझें — स्टिल्ट प्लस 4 का मतलब क्या होता है?

स्टिल्ट फ्लोर वह मंजिल होती है जो इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर होती है लेकिन उसका उपयोग पार्किंग या आम सुविधाओं के लिए किया जाता है। यह कंक्रीट के खंभों पर टिकी होती है और चारों तरफ से दीवारों से घिरी नहीं होती। सीधे शब्दों में कहें — आपने शहरों में जो इमारतें देखी हैं जिनका भूतल (ग्राउंड फ्लोर) खुला रहता है और गाड़ियां खड़ी होती हैं, वही स्टिल्ट फ्लोर है।

अब 'स्टिल्ट प्लस 4' का मतलब है — इस खुले पार्किंग वाले तल के ऊपर चार और मंजिलें बनाने की अनुमति। इस मॉडल के तहत एक आवासीय प्लॉट पर चार अलग-अलग फ्लोर के स्वतंत्र फ्लैट बनाए जा सकते हैं, जिन्हें अलग-अलग परिवारों को बेचा जा सकता है — इसे ही 'बिल्डर फ्लोर' कहते हैं। यानी जिस प्लॉट पर पहले एक परिवार का घर था, वहां अब चार परिवार अलग-अलग मंजिल पर रह सकते थे।

2013 से शुरू हुई यह नीति — बार-बार बनी और टूटी

हरियाणा सरकार ने 2013 में पहली बार लाइसेंसी कॉलोनियों में स्टिल्ट पार्किंग की अवधारणा लागू की। फिर 2017 में हरियाणा बिल्डिंग कोड में बदलाव कर स्टिल्ट के ऊपर चार मंजिलें बनाने की अनुमति दी गई, जिसे S+4 पॉलिसी कहा गया। 2018 तक यह पॉलिसी पूरी तरह लागू हो गई और चौथी मंजिल को अलग आवासीय इकाई के रूप में बेचने की भी अनुमति मिल गई।  गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहरों में जमीन की कीमतें आसमान छू रही थीं, ऐसे में यह मॉडल प्लॉट मालिकों और बिल्डर्स दोनों के लिए फायदेमंद साबित हुआ। 

लेकिन अनियंत्रित निर्माण और बुनियादी ढांचे पर बढ़ते दबाव के चलते RWA (रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) ने विरोध शुरू किया। लंबे विरोध के बाद फरवरी 2023 में सरकार ने इस पर रोक लगाकर एक विशेषज्ञ समिति बनाई, फिर 16 महीने बाद 2 जुलाई 2024 को नई शर्तों के साथ दोबारा अनुमति दे दी। इसी 2 जुलाई 2024 की अधिसूचना को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई और 2 अप्रैल 2026 को कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी।
अतिक्रमण हटाने की डेडलाइन और हरियाणा के हर शहर पर असर

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हाईकोर्ट के आदेश पर गुरुग्राम के सेक्टर 28 और DLF फेज-1 में जांच कराई गई, जिसमें पता चला कि 12 मीटर चौड़ी सड़कें सिकुड़कर सिर्फ 4.5 मीटर और 10 मीटर की सड़कें महज 4 मीटर रह गई हैं। हाईकोर्ट ने सरकार पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि हरियाणा ने केवल राजस्व कमाने के लिए आम जनता की सुरक्षा को दांव पर लगाया। 

करनाल में DTP गुंजन वर्मा ने पब्लिक नोटिस जारी करके कहा कि स्टिल्ट फ्लोर का उपयोग केवल स्वीकृत भवन योजना के अनुसार पार्किंग के लिए ही हो सकता है — किसी भी प्रकार का अनधिकृत निर्माण, दुकान या व्यावसायिक उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है और जिले की करीब 50 कॉलोनियों में अभियान चलाया जाएगा। TCPD निदेशक चंद्र शेखर खरे के अनुसार जब तक हाईकोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आता, S+4 के लिए कोई नया लेआउट प्लान, जोनिंग प्लान या बिल्डिंग प्लान मंजूर नहीं होगा — हालांकि जिन्हें पहले मंजूरी मिल चुकी है, उन्हें छूट रहेगी। इस आदेश का सीधा असर गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और पंचकूला सहित कई शहरों में देखने को मिलेगा और बड़े स्तर पर सीलिंग व डेमोलिशन की तैयारी भी मानी जा रही है। 

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