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शादी के बाद भी नहीं रुकी पढ़ाई: मुंढाल की सरिता बनीं असिस्टेंट प्रोफेसर, एक साल में पाई दूसरी सरकारी नौकरी

भिवानी की बहू सरिता का कमाल: एक ही साल में दूसरी बार HPSC पास कर बनीं असिस्टेंट प्रोफेसर
 
 
भिवानी के मुंढाल गांव की असिस्टेंट प्रोफेसर सरिता रोहिल्ला की प्रतीकात्मक तस्वीर

भिवानी जिले के गांव मुंढाल खुर्द की बहू सरिता ने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए एक नई मिसाल पेश की है। हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) द्वारा हाल ही में घोषित परीक्षा परिणामों में सरिता का चयन असिस्टेंट प्रोफेसर (भूगोल) के राजपत्रित (Gazetted) पद पर हुआ है। सबसे बड़ी बात यह है कि महज़ एक साल के भीतर एचपीएससी के जरिए यह उनकी दूसरी बड़ी कामयाबी है; इससे पहले वर्ष 2025 में भी उनका चयन PGT भूगोल (लेक्चरर) के पद पर हुआ था।

विषय पर मजबूत पकड़ और पति के साथ ने आसान की राह

सरिता की यह दोहरी उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि उन्होंने एक ही विषय (भूगोल) में बैक-टू-बैक दो राजपत्रित पदों पर सफलता हासिल की है। यह उनकी अपने विषय पर गहरी पकड़ और असाधारण शैक्षणिक योग्यता को साबित करता है। मूल रूप से भिवानी के ही गांव पहाड़ी की रहने वाली सरिता के पिता का नाम वरिंद्र पहाड़ी है, जबकि उनका विवाह मुंढाल खुर्द निवासी विकास रोहिल्ला से हुआ है।

उनके पति विकास स्वयं शिक्षा जगत से जुड़े हैं। वे वर्तमान में एक अध्यापक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं और साथ ही अपनी पीएचडी (PhD) की पढ़ाई भी पूरी कर रहे हैं। एक विवाहित महिला के रूप में घर की जिम्मेदारियों को संभालते हुए उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन सरिता ने अपने दृढ़ संकल्प से इसे मुमकिन कर दिखाया है।

भिवानी के मुंढाल गांव की असिस्टेंट प्रोफेसर सरिता रोहिल्ला की प्रतीकात्मक तस्वीर

"शिक्षण केवल पेशा नहीं, समाज सेवा का माध्यम है"

सरिता ने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता के आशीर्वाद और ससुराल पक्ष के निरंतर सहयोग को दिया है। विशेष रूप से उन्होंने अपने पति विकास रोहिल्ला को अपनी इस यात्रा का सबसे बड़ा आधार बताया। सरिता का स्पष्ट मानना है कि यदि लक्ष्य निर्धारित हो और इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।

असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयनित होने के बाद सरिता ने कहा कि शिक्षण कोई सामान्य पेशा नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर समाज की सेवा करने और भविष्य संवारने का एक सशक्त माध्यम है। सरिता की यह कहानी उन हजारों युवाओं और विशेषकर ग्रामीण परिवेश की महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो शादी के बाद भी सरकारी सेवा में जाने का सपना देखती हैं।
 

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