राजस्थान की अटकी भर्तियां: भर्ती परीक्षा पास करने के बावजूद बेरोजगार हजारों युवा.

राजस्थान में सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले हजारों युवा आज भी सिर्फ इंतजार की पीड़ा झेल रहे हैं। उन्होंने न केवल भर्ती परीक्षाएं पास की हैं, बल्कि फाइनल मेरिट में नाम आने के बावजूद आज तक नियुक्ति पत्र नहीं मिला। वजह है कोर्ट केस, विभागीय लापरवाही, और भर्ती में अनियमितताओं का लंबा सिलसिला।
भर्ती पास करने के बावजूद खाली हाथ क्यों हैं युवा?
राज्य में पिछले कुछ वर्षों से कई महत्वपूर्ण भर्तियां कोर्ट में फंसी हैं। ये वे परीक्षाएं हैं जिनमें लाखों अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया, हजारों का चयन हुआ, लेकिन नियुक्ति की प्रक्रिया आज भी अधर में लटकी है। इससे न केवल मानसिक तनाव बढ़ा है, बल्कि कई युवाओं को आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ रहा है।
राजस्थान की प्रमुख अटकी भर्तियां:
1. खाद्य सुरक्षा अधिकारी भर्ती 2022
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कुल चयनित: 298
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स्थिति: RPSC द्वारा चयन सूची जारी कर स्वास्थ्य विभाग को भेजी गई, लेकिन कोर्ट केस के चलते नियुक्ति रुकी।
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विवाद: डेपुटेशन पर काम कर रहे कर्मचारियों ने भर्ती को चुनौती दी।
2. मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर (MVI) भर्ती 2021
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कुल चयनित: 197
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रिक्त पद: 377
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विवाद: डिप्लोमा और बीटेक के बीच योग्यता विवाद। कोर्ट में केस लंबित।
3. पशुधन सहायक भर्ती 2022
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कुल चयनित: 6433
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विवाद: नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया को लेकर मामला कोर्ट में।
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स्थिति: 38 अभ्यर्थियों की नियुक्ति 8 महीनों से रुकी हुई।
4. शिक्षक भर्ती 2018-2021
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प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2018: 213 पदों का रिजल्ट आया, लेकिन दस्तावेज सत्यापन नहीं हुआ।
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अध्यापक भर्ती 2021: 1260 पदों में से कई विषयों के परिणाम आज भी लंबित।
5. सूचना सहायक भर्ती 2023
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कुल चयनित: 3415
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स्थिति: कोर्ट केस के चलते नियुक्ति रुकी हुई है।
6. ग्राम विकास अधिकारी (VDO) भर्ती 2021
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पद: 713
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विवाद: प्रश्नपत्र विवाद के कारण मामला कोर्ट में।
7. सब इंस्पेक्टर भर्ती 2021
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पद: 850
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विवाद: पेपर लीक, गिरफ्तार ट्रेनी, कोर्ट में मामला।
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स्थिति: 8 जुलाई 2025 की सुनवाई में कोई ठोस निर्णय नहीं आया। अब 9 जुलाई की अगली सुनवाई पर सबकी निगाहें।
भविष्य की भर्तियां और पुराने चयनितों की अनदेखी
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 2024-26 के लिए भर्ती कैलेंडर में 50,000 से अधिक पदों पर नई भर्तियों की घोषणा की है। इसमें पटवारी, वन रक्षक और शिक्षक जैसी प्रमुख भर्तियां शामिल हैं। परंतु जिन युवाओं ने वर्षों पहले परीक्षाएं पास कीं, वे अब भी सड़क पर विरोध प्रदर्शन और कोर्ट के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।