https://www.choptaplus.in/

सब्जी और स्ट्रॉबेरी उत्पादन में विविधता: किसान आशुतोष पाण्डेय की सफलता की कहानी

खेती में विविधता की ओर कदम
 
sucess story
बक्सर जिले के प्रगतिशील किसान श्री आशुतोष पाण्डेय ने इस दिशा में एक प्रेरणादायक कदम उठाया है।

   Sucess story: आज के समय में किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है एक ही फसल पर निर्भर न रहना। जलवायु परिवर्तन, बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ती लागत के बीच अगर किसान अपनी आय को स्थिर और लाभदायक बनाना चाहते हैं तो फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को अपनाना ही होगा।

बक्सर जिले के प्रगतिशील किसान श्री आशुतोष पाण्डेय ने इस दिशा में एक प्रेरणादायक कदम उठाया है। उन्होंने सब्जियों और स्ट्रॉबेरी (झरबेर) की खेती करके यह साबित किया कि सही योजना और स्मार्ट खेती से किसान अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं।

वर्ष भर सब्जी उत्पादन की योजना

श्री पाण्डेय ने इस तरह से फसल योजना तैयार की है कि उनकी जमीन पर सालभर सब्जियों का उत्पादन होता रहे। उन्होंने ऑफ-सीजन बाजारों को ध्यान में रखते हुए निम्न सब्जियों की खेती की:

आलू

सेम (Beans)

शिमला मिर्च

लोबिया (राजमा सब्जी)

धनिया

इन फसलों से उन्हें न सिर्फ अच्छा उत्पादन मिला, बल्कि बाजार में उनकी सब्जियों की लगातार डिमांड भी बनी रही।

स्ट्रॉबेरी की खेती से नई राह

साल 2017 में आशुतोष पाण्डेय ने 0.4 हेक्टेयर क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। शुरुआत में यह प्रयोगात्मक कदम था, लेकिन जल्दी ही यह उनकी सबसे लाभकारी फसल बन गई।

 उन्होंने 5 टन/एकड़ स्ट्रॉबेरी उत्पादन किया।

 बाजार में यह फसल ₹100 से ₹200 प्रति किलो तक बिकी।

0.25 हेक्टेयर में की गई स्ट्रॉबेरी खेती ने पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना ज्यादा लाभ दिलाया।

उनकी सफलता देखकर आसपास के कई किसानों ने भी स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की।

 उत्पादन और पैदावार

श्री पाण्डेय ने पारंपरिक तरीके से अलग, क्यारी आधारित खेती (Raised Bed Farming) अपनाई। इससे न सिर्फ उत्पादन बढ़ा बल्कि मिट्टी की उर्वरता और पौधों की देखभाल आसान हुई।

आलू: 140 क्विंटल प्रति एकड़

हरी फलियाँ (सेम): 50–55 क्विंटल प्रति एकड़

धनिया: स्थानीय बाजारों में लगातार सप्लाई

 बक्सर कृषि विज्ञान केंद्र का योगदान

किसान आशुतोष की सफलता में बक्सर कृषि विज्ञान केंद्र का अहम योगदान रहा। उन्होंने किसानों को दी:

 उच्च गुणवत्ता वाली स्ट्रॉबेरी की रोपण सामग्री

 फसलों के भंडारण और मार्केटिंग की सुविधा

तकनीकी मार्गदर्शन

इससे किसानों को बाजार में सीधा फायदा मिला और उनकी आय में स्थिरता आई।

 आर्थिक विश्लेषण: फसलों का लागत-लाभ अनुपात

श्री पाण्डेय की खेती का आर्थिक पक्ष भी बेहद मजबूत रहा। नीचे दी गई तालिका उनके विभिन्न फसलों से हुए लाभ को दर्शाती है:

इस तालिका से साफ है कि स्ट्रॉबेरी की खेती सबसे ज्यादा लाभकारी साबित हुई।

स्ट्रॉबेरी और सब्जी उत्पादन के लाभ

1. उच्च लाभकारी खेती स्ट्रॉबेरी और off-season सब्जियां पारंपरिक गेहूं-धान से ज्यादा मुनाफा देती हैं।

2. रोजगार सृजन खेती में ज्यादा मजदूरों की जरूरत होने से ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिलता है।

3. बाजार की स्थिर मांग होटल, रेस्टोरेंट और स्थानीय मंडी में इन फसलों की हमेशा डिमांड रहती है।

4. ग्रामीण युवाओं को आकर्षण आधुनिक खेती तकनीक और अधिक आय से युवा भी खेती को अपनाने की ओर बढ़ते हैं।

किसान आशुतोष पाण्डेय ने यह दिखा दिया कि सब्जियों और स्ट्रॉबेरी उत्पादन में विविधता लाकर किसान अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं।

आज जब खेती को लेकर निराशा की बातें होती हैं, ऐसे में आशुतोष जैसे किसान Smart Farming और Off-Season Cultivation का उदाहरण बनकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं।

बक्सर कृषि विज्ञान केंद्र का योगदान

किसान आशुतोष की सफलता में बक्सर कृषि विज्ञान केंद्र (KVK Buxar) का अहम योगदान रहा। उन्होंने किसानों को दी:

उच्च गुणवत्ता वाली स्ट्रॉबेरी की रोपण सामग्री

 फसलों के भंडारण और मार्केटिंग की सुविधा

तकनीकी मार्गदर्शन

इससे किसानों को बाजार में सीधा फायदा मिला और उनकी आय में स्थिरता आई।

स्ट्रॉबेरी और सब्जी उत्पादन के लाभ

1. उच्च लाभकारी खेती स्ट्रॉबेरी और off-season सब्जियां पारंपरिक गेहूं-धान से ज्यादा मुनाफा देती हैं।

2. रोजगार सृजन खेती में ज्यादा मजदूरों की जरूरत होने से ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिलता है।

3. बाजार की स्थिर मांग होटल, रेस्टोरेंट और स्थानीय मंडी में इन फसलों की हमेशा डिमांड रहती है।

4. ग्रामीण युवाओं को आकर्षण आधुनिक खेती तकनीक और अधिक आय से युवा भी खेती को अपनाने की ओर बढ़ते हैं।

किसान आशुतोष पाण्डेय ने यह दिखा दिया कि सब्जियों और स्ट्रॉबेरी उत्पादन में विविधता लाकर किसान अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं।

Rajasthan