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जानिए सोनू कुमार शर्मा कैसे हुए कामयाब...........

प्रेरणा स्रोत सोनू कुमार शर्मा बिहार, भारत से एक युवक

सोनू के पिता, गंगा प्रसाद, इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ITI) में एक छोटे से पद पर काम करते थे

 
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मेहनत और हार्डवर्क ने उसे आईआईटी में दाखिला दिलाया

सोनू पटना के एक सरकारी स्कूल में पढ़ता था,

2015 में, सोनू ने आईआईटी जेईई मेन्स परीक्षा में 31 वें स्थान हासिल किया

प्रेरणा स्रोत सोनू कुमार शर्मा की कहानी के बारे में

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सोनू कुमार शर्मा बिहार, भारत से एक युवक हैं, जिन्होंने कई बाधाओं और चुनौतियों का सामना करके प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) में सीट हासिल की।

सोनू के पिता, गंगा प्रसाद, इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ITI) में एक छोटे से पद पर काम करते थे और अपने परिवार को पेट भरने के लिए पर्याप्त धन प्राप्त करते थे। उनके संसाधनों की सीमा के बावजूद, गंगा प्रसाद सोनू के लिए एक बेहतर भविष्य के सपने देखते थे। हालांकि, सोनू को अपने शैक्षणिक यात्रा में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

सोनू पटना के एक सरकारी स्कूल में पढ़ता था, जहां शिक्षक अनियमित थे और उनके पास सभी आवश्यक किताबें और संसाधन नहीं थे। फिर भी, वह दृढ़ संकल्प और मेहनत से अपने उद्देश्य की ओर काम करता रहा।

उस समय सोनू की उम्र 15 साल थी और उसे आईआईटी की जानकारी नहीं थी, लेकिन उसे पढ़ाई में बहुत रुचि थी। उसके पास एक समय ताबड़तोड़ स्कूल में गुजरता था। उस स्कूल में शिक्षक नहीं थे और किताबें भी बहुत कम थीं। इस तरह सोनू अपनी पढ़ाई से थोड़ी दूरी रखने लगा।

बाद में सोनू ने एक नौकरी ढूंढने के लिए अपने गांव से दूर जाने का फैसला किया। वह दिल्ली गया और वहां पर एक कंपनी में नौकरी मिल गई। उसकी मुश्किलें बदतर हो गईं थीं क्योंकि दिल्ली में रहने और जीवन चलाने के लिए काफी पैसे चाहिए थे। इसलिए सोनू ने सोचा कि उसे अधिक से अधिक पढ़ने का मौका मिलना चाहिए। इसलिए वह दिल्ली के एक सरकारी कॉलेज में दाखिला ले लिया। वहां पर उसे अधिक जानकारी मिली और वह जीवन में आगे बढ़ने के लिए तैयार हो गया।

उसकी मेहनत और लगन उसे अगले चरण में ले गईं। जब सोनू एक बार आईआईटी के बारे में सुना तो उसने निर्धारित किया कि वह आईआईटी में जाकर अपनी जिंदगी को सफल बनाएगा। लेकिन यह सपना नहीं था आसान। उसके परिवार की आर्थिक स्थिति गरीब थी और उसे आईआईटी की फीस भी नहीं दे सकते थे।

लेकिन सोनू हार नहीं माना। उसने अपनी तैयारी शुरू की और नौकरी करने लगा ताकि वह अपनी फीस जुटा सके। उसने स्कूल से ऊंची उत्तीर्णता प्राप्त की और अपनी प्रथम परीक्षा में भी उत्तीर्ण हुआ। वह बाकी की परीक्षाओं के लिए और भी मेहनत करने लगा।

उसकी मेहनत और हार्डवर्क ने उसे आईआईटी में दाखिला दिलाया। यह एक बड़ी जीत थी सोनू के लिए। उसने अपने सपने के लिए लड़ा था और उसे प्राप्त करने के लिए उसने सफलता की ओर बढ़ते हुए समय का उपयोग किया।

वह आईआईटी में शुरूआती दिनों में अपने साथी छात्रों को इस बात का ज्ञान देने लगा कि समय का बहुत मूल्य होता है फिर एक दिन, सोनू के शिक्षक ने उसे सलाह दी कि वह आईआईटी एग्जाम के बारे में जानकारी लें। इससे पहले सोनू को आईआईटी के बारे में कुछ भी पता नहीं था, लेकिन उसे यकीन था कि ये एक अच्छा कॉलेज होता होगा। शिक्षक ने उसे बताया कि आईआईटी में प्रवेश परीक्षा होती है और उसे इसमें सफल होने के लिए अध्ययन करना होगा।

सोनू ने इस सलाह को माना और अपने अध्ययन को और ज्यादा मेहनती बना दिया। वह दिन रात पढ़ता था और इसके अलावा उसने अपने शिक्षकों से भी बहुत सारे प्रश्न पूछे। उसने सभी विषयों में अच्छा प्रदर्शन किया और आईआईटी एग्जाम के लिए अपनी तैयारी खत्म की।

2015 में, सोनू ने आईआईटी जेईई मेन्स परीक्षा में 31 वें स्थान हासिल किया था। इसके बाद उसने आईआईटी एग्जाम में भी अच्छा प्रदर्शन किया और दिल्ली के एक टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला प्राप्त किया।

सोनू के सपनों की पूर्ति हुई थी, शूरू की हुई कठिनाईयों से संघर्ष जारी रहा और सोनू ने बार बार अपना लक्ष्य सामने रखा। उसने अपनी शिक्षा को दृष्टिकोण दिया और नए-नए साधन खोजे। वह स्वयं बनाए गए नोट्स पर ध्यान देता था और समय-समय पर इसे रिव्यू करता था। वह अपने अनुसार अपनी पढ़ाई को निर्धारित करता था। उसने अपनी मेहनत से बचपन से लेकर बड़ी परीक्षाओं तक के सभी बिन्दुओं पर ध्यान दिया और नियमित रूप से अपनी तैयारी को सुधारता रहा।

सोनू को बचपन से ही पढ़ाई करने का शौक था। उसके पिता गंगा प्रसाद उसकी पढ़ाई को सुधारने के लिए उसकी सहायता करना चाहते थे, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति इसकी अनुमति नहीं देती थी। सोनू ने इस बात से निराश नहीं होकर आगे बढ़ते हुए अपनी तैयारी जारी रखी और अगले साल आईआईटी जेईई परीक्षा में सफल होने का सपना देखते रही।

उसने परीक्षा के लिए नई-नई स्टडी टेक्निक्स सीखीं और अपने शैक्षण को मजबूती दी अगले साल, सोनू ने पुनः प्रयास करते हुए जेईई मेन्स में अच्छे अंक हासिल किए। उन्होंने अपने योग्यता के आधार पर आईआईटी कानपुर में एडमिशन प्राप्त किया। लेकिन उन्होंने इससे पहले एक बड़ा फैसला लिया था। वे अपने पिता के निधन के बाद घर का पालन-पोषण करने के लिए अपने इंजीनियरिंग कोर्स छोड़ने की फैसला ले चुके थे। लेकिन उन्होंने यह तय किया कि वे अपने परिवार को अगली पीढ़ी के लिए बेहतर बनाने के लिए एडमिशन लेंगे।

आज, सोनू एक सफल इंजीनियर हैं और उन्होंने अपनी कठिन जीवन कहानी से कई लोगों को प्रेरणा दी है। उन्होंने कहा है कि यदि आप अपने सपनों को प्राप्त करना चाहते हैं, तो आपको बदलाव के लिए तैयार होना होगा और मुश्किलों का सामना करना होगा।

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