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Sirsa News: देशभर के लुहार समुदाय का महाकुंभ: 27 अप्रैल को गांव नहराणा में लगेगा देदा पीर का विशाल मेला, कुश्ती दंगल रहेगा आकर्षण

हरियाणा के सिरसा जिले के गांव नहराणा में सैकड़ों वर्षों से गडरिया लोहारों की आस्था का केंद्र बना देदा पीर मेला 27 अप्रैल की रात को आयोजित किया जाएगा। देशभर से लुहार जाति के लोग यहां पहुंचेंगे। समाधि पर माथा टेकने के बाद रात्रि जागरण, भंडारा और कुश्ती दंगल मुख्य आकर्षण होंगे।
 
Deda Peer Mela Sirsa 2026: Sirsa News: 27 अप्रैल को गांव नहराणा में लगेगा देदा पीर का विशाल मेला, कुश्ती दंगल रहेगा आकर्षण

Sirsa News: हरियाणा के सिरसा जिले के गांव नहराणा में सैंकड़ों वर्षों से गडरिया लोहारों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां पर गडरिया लोहारों के उत्तरी भारत का सबसे बड़ा मेला आयोजित किया जाता है। देश के कोने-कोने से लुहार जाति के लोग गांव में बने मंदिर देदा पीर लुहार खेमा समाधि स्थल पर माथा टेकने और सुख-शांति की कामना करने पहुंचते हैं। इस साल भी 27 अप्रैल की रात को यह मेला धूमधाम से मनाया जाएगा।

मेले का मुख्य आकर्षण परंपरागत कुश्ती दंगल होता है, जिसे देखने के लिए आसपास के गांवों के लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। इसके अलावा रात्रि जागरण में भजन-कीर्तन और भंडारा लगाकर प्रसाद वितरण किया जाता है। दूर-दराज से आए श्रद्धालु सुबह समाधि पर माथा टेकने के बाद अपने-अपने डेरों को लौट जाते हैं।

सैकड़ों साल पुरानी परंपरा, लुहारों का महाकुंभ

गांव नहराणा में बने प्राचीन देदा पीर मंदिर में हर वर्ष 27 अप्रैल की रात्रि को मेले का आयोजन किया जाता है। यह मेला गडरिया लोहार समुदाय के लिए उत्तरी भारत का सबसे बड़ा आयोजन माना जाता है। मेले में हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और चंडीगढ़ समेत कई राज्यों से लुहार जाति के लोग पहुंचते हैं।

Deda Peer Mela Sirsa 2026

मेले की सारी व्यवस्थाएं देदा पीर लुहार खेमा समाधि स्थल सेवादार समिति की ओर से की जाती हैं। समिति के प्रधान सुनील बैनीवाल ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी व्यवस्थाओं को पुख्ता किया गया है, ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।

ढोल की थाप और रात भर जागरण का अलग ही उत्साह

मेले में श्रद्धालुओं का स्वागत परंपरागत ढोल बजाकर किया जाता है। रविवार शाम को कुश्ती का दंगल होता है, जिसमें विभिन्न प्रदेशों से आए पहलवान दमखम दिखाते हैं। इसके बाद रात्रि में जगराते का आयोजन होता है, जिसमें कलाकार देव पीर लुहार खेमा के भजन प्रस्तुत करते हैं। इन भजनों पर पंडाल में बैठे लोग झूमते नजर आते हैं।

भंडारा लगाकर प्रसाद वितरित किया जाता है और श्रद्धालु मन्नत मांगने के लिए प्रसाद चढ़ाते हैं। गांव के लोग भी दूर-दराज से आए मेहमानों की मेजबानी में कोई कसर नहीं छोड़ते। लुहार डोजी ने बताया कि हर साल ग्रामीण बढ़-चढ़कर सहयोग करते हैं, यही इस मेले की सबसे बड़ी विशेषता है।

यह मेला सिर्फ आस्था का नहीं, गडरिया लोहार समुदाय की पहचान का प्रतीक

यह मेला केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं है, बल्कि गडरिया लोहार समुदाय के लिए अपनी जड़ों से जुड़ने का एक मौका भी है। यह समुदाय परंपरागत रूप से घुमंतू जीवन जीता है, और यह वार्षिक मेला उनके लिए एक सामूहिक मिलन का अवसर होता है। देशभर से आए लुहार यहां एक-दूसरे से मिलते हैं, अपनी सुख-दुख की बातें साझा करते हैं और अपनी सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखते हैं।

समाधि पर माथा टेकने के बाद श्रद्धालु सुबह ही अपने डेरों को लौट जाते हैं, लेकिन इस रात्रि जागरण और दंगल का उत्साह पूरे साल उनके मन में बसा रहता है।
 

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