न सुन सकता है न बोल सकता, लेकिन दिल में कुछ करने का जजबा, शूटिंग में गोल्ड मेडल से दादी का सपना किया पूरा
हरियाणा के सिरसा जिले के एक छोटे से गाँव कागदाना के मूक-बधिर युवा खिलाड़ी मकसूद खान (पुत्र नेक मोहम्मद) ने भोपाल में आयोजित इंडिया ओपन शूटिंग कंपीटिशन 2026 में 10 मीटर एयर पिस्टल डेफ कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीतकर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। जो बच्चा न सुन सकता था, न बोल सकता था — उसी ने अपने सटीक निशाने से पूरे देश में अपनी पहचान बनाई।
मकसूद की इस जीत ने जिस एक इंसान की ज़िंदगी सबसे ज़्यादा बदली, वो हैं उनकी दादी हाजरा बानो। स्वर्गीय सादिक खान की पत्नी हाजरा बानो बचपन से ही अपने पोते की इस स्थिति को लेकर मन ही मन घुटती रहती थीं। पोते का न सुन पाना, न बोल पाना — ये फ़िक्र उन्हें हमेशा सताती थी।
लेकिन जब उन्हें पता चला कि उनके उसी पोते ने राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीता है, तो उनकी आँखें भर आईं। उन्होंने भावुक होकर कहा कि पोते की इस कामयाबी ने उनके दिल को वो सुकून दिया जो सालों से नहीं मिला था। एक दादी का वो दर्द, जो वो वर्षों से अकेले में महसूस करती थीं — आज गर्व में बदल चुका था।
मकसूद की यह कामयाबी रातों-रात नहीं आई। पिछले 7 महीनों से वो जोरा शूटिंग स्पोर्ट्स अकादमी में कड़ी ट्रेनिंग ले रहे थे। अकादमी के कोच प्रल्हाद कासनिया ने बताया कि मकसूद ने पूरी लगन और मेहनत के साथ अपने खेल को निखारा।
यह प्रतियोगिता भोपाल में आयोजित इंडिया ओपन कंपीटिशन इन राइफल एंड पिस्टल इवेंट 2026 का हिस्सा थी, जहाँ देशभर से सैकड़ों शूटर्स अपनी प्रतिभा दिखाने आए थे। 68वीं नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में डेफ कैटेगरी समेत कुल 759 मेडल दिए गए और 16,500 से ज़्यादा खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। New Kerala इसी विशाल मंच पर मकसूद ने 10 मीटर एयर पिस्टल डेफ इवेंट में गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
यह मकसूद का पहला बड़ा पदक नहीं है। इससे पहले वो प्री-स्टेट डेफ प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज मेडल भी जीत चुके हैं, जो उनकी लगातार बढ़ती प्रतिभा का प्रमाण है।
मकसूद की जीत की खबर जैसे ही गाँव कागदाना पहुँची, पूरे इलाके में जश्न का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने मकसूद को बधाइयाँ दीं और उनके घर पर मिलने वालों का तांता लग गया।
अकादमी संचालक और कोच संदीप देहरू (बिल्लू) ने मकसूद को बधाई देते हुए उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि मकसूद जैसे खिलाड़ी यह साबित करते हैं कि शरीर की कोई भी कमज़ोरी इरादों को नहीं रोक सकती।
यह उल्लेखनीय है कि भारतीय डेफ शूटर्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी धमाका कर रहे हैं — वर्ल्ड डेफ शूटिंग चैंपियनशिप 2024 में भारत ने 20 मेडल जीते थे, जिनमें 7 गोल्ड शामिल थे। Sportskeeda मकसूद जैसे युवा खिलाड़ी इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
मकसूद की कहानी सिर्फ एक गोल्ड मेडल की कहानी नहीं है — यह उन लाखों परिवारों की उम्मीद की कहानी है, जो किसी दिव्यांग बच्चे के साथ हर रोज़ जीते हैं। मकसूद ने यह दिखा दिया कि सुनने और बोलने की शक्ति भले न हो, लेकिन जीत की भाषा सबको एक जैसी सुनाई देती है।
